भारतकोश
कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)

कबीर साहेब द्वारा

स्रोत: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)

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नहीं होने देता, उनमें गोंद भी नहीं होने पाता, जिससे हड्डियाँ कठिन और निर्जीव हो जाती हैं जिसका परिणाम गठिया और ध्वजभङ्ग होता है।

चरबी (मज्जा) पर इसका ऐसा असर होता है कि, उनको सुखा देता है अलकाहल यानी मदिराके सारभागका स्वभाव है कि, चरबीको पतला करे यदि थोड़ी हो तो सुखा दे, इसलिये मद्य भी वँसाही करता है।

चमड़े पर इसका असर पड़नेसे उसपर नाना प्रकारके चर्मरोग उत्पन्न होते हैं, वैसेही इन्द्रियोंपर तथा अन्तरीय शक्तियोंपर भी इसका असर होता है थोड़े समयतक तो उनमें गरमी पैदा करके बड़ा जोश और बल पैदा कर देता है, फिर उसी प्रकारसे उसमें पूरी ठण्ढक और सुस्ती आ जाती है।

उपस्थ इन्द्रियोंके रोगोंको फैलानेसे प्रायः मसाना कमजोर हो जाता धातु पतली हो जाती है, विषयकी इच्छा बहुत बढ़ जाती है, पशु वृत्तिमें विशेषता हो जाती है, इस प्रकारसे थोड़े दिनमें मनुष्य नामर्द हो जाता है। मसाना कमजोर हो जाता है, शराबी कभी २ कपड़ोंमें पिशाब भी कर देता है। कलेजेके अन्तरङ्ग तत्वको मिलाकर चरबी बना देता है, खालके अन्दर जा पाचन शक्तिमें मिलकर पाचनशक्तिको नष्ट कर देता है, इसलिये शराबी प्रायः वमन किया करता है, थोड़ेही दिनोंमें उसकी पाचनशक्ति जाती रहती है वह किसी कामकी नहीं रहती। पेटकी शाखायें तथा अंतरियोंके उलटे हो जानेसे कबजकी बीमारी हो जाती है।

कलेजेपर इसका परिणाम—हृदयका काम है कि, भोजनके साथ पिप्त मिलावे और कारबोलिक आदिकको रगोंके द्वारा फेफड़े तक पहुँचावे, शराब उसको कमजोर कर देती है, इस कारण मद्यपोंमेंसे सँकड़े पीछे निश्चानवे हृदयके रोगसे मर जाते हैं।

इसका फेफड़ेपर असर—फेफड़ा अधिक परिश्रमके कारण निर्बल हो जाता है, जिससे तपेदिक (विषमज्वर) दमा तथा सिलकी बीमारी हो जाती है।

धड़कन—हृदय रक्तके उलटने पलटनेके कारण धड़कता रहता है, मद्यप प्रायः सोते २ चिल्ला उठता है, इस प्रकार मद्यपकी जिन्दगी दुःखमय हो जाती है।

आँखोंपर मद्यका परिणाम—यह होता है कि, आँखोंका बल घट जाता है उनमें लाली छा जाती है, उसी तरह कानोंकी शक्ति भी घट जाती है, जिह्वा फूल जाती है, होठोंमें सूजन आ जाती है, जिसके कारण शुद्ध शब्द नहीं निकलता पाँव चलनेसे रह जाते हैं, कामदेवकी शक्ति घट जाती है।