BharatKosha
कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)

by कबीर साहेब

Source: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (origin)

Devanagarihipublished1,367 pages

Page 1035 of 1367

Read in context
Page 1035

शुद्ध है उसमें कोई मिलाबट नहीं । जिसमें कुछ मेल है वह द्वैत है मायाका खेल है । बिना पारख गुरुके सत्य परमात्माकी भक्ति कोई नहीं बतला सकता । एक परमात्माकी भक्ति बही है कि, पहले उस परमात्माको पहचाने । जबतक ईश्वरका ज्ञान न हो, तबतक भक्ति कैसे हो सकती है ? पहले ज्ञान होगा, पीछे भक्ति होगी । नये पुराने पैगम्बरोंमेंसे किसीकी भी सत्य अद्वितीय ईश्वरका ज्ञान होता तो वे अवश्य एक परमात्माकी भक्ति करते ।

खुदाने आदमको अपने रूपमें बनाया—आदम पांच तत्वके संयोगसे बना था । इससे प्रमाणित होता है कि, उसका खुदा भी पांचतत्वसे भिन्न नहीं था । आकाशके रंगका खुदा सांसारिक तत्वोंके संयोगसे पृथक नहीं है । यद्यपि उससे बहुत ऐश्वर्य और सामर्थ्य है तो भी वह अद्वितीय और एक नहीं ठहर सकता ।

मूसाकी उत्पत्ति नामक पहली किताबको ३ बाबकी २२ आयतसे स्पष्ट है कि, यह अपने साथी मण्डलीमें से एकके समान था । इस आयतसे स्पष्ट भेद प्रगट होता है, उसमें अद्वैतपना और एकता सिद्धि नहीं होती । खुदा अद्वितीय और भेद रहित, एक नहीं, वरन् अनन्त खुदा प्रमाणित होते हैं, जो भिन्न भिन्न ब्रह्माण्डोंमें खुदाई करते हैं । जब मूसाने स्वयं एक अद्वितीय परमात्माकी भक्तिका आनन्द न उठाया तो वे दूसरोंको क्या बतला सकते हैं ?

बूत परिस्तीको खुदा परस्ति—अद्वैत ज्ञानके विषयमें, स्व सम्बेदकी शिक्षा बिना जो कुछ कहा जाता है वह मिथ्या है । हिन्दू जिन तीन ईश्वरोंकी भक्ति करते आते हैं उन्हीं तीन खुदाओंकी भक्ति इबराहीमने भी की । अगणित सिद्ध साधु और महात्मा इन तीनों ईश्वरोंके तुल्य पद पर स्थित हैं । अनन्त उनसे ही बढ़कर हैं कितने उनसे घटकर हैं । यदि एक अद्वितीय परमात्माकी भक्तिकी सुधि नहीं हुई तो वेद और किताबोंके पढ़नेसे क्या लाभ ? उसकी सुधि हुये बिना मनुष्यत्व कहाँ है ? जहाँ एक अद्वितीय परमात्मा की भक्ति है वहाँ वेद और किताब सब गूंगे हैं । नाद और वेद पांच अहंकारके घरेमें हैं, पांचों अहंकार मायासे हैं मायाके सब कौतुकोंमें सने हुये हैं । यह सारा संसार मायाकी पूजा करता है, उसकी भक्तिको ही ईश्वरकी भक्ति मानता है । जो कुछ इस जीवने मान लिया है उसको वही सत्य जान पड़ता है, उसी पर विश्वास जमा हुआ है । इसके ईश्वरकी शक्ति सीमाबद्ध है, असीम नहीं है । यह खुदा नाशमान है, अविनाशी नहीं । क्योंकि, महाप्रलयके समय इस खुदाईका झण्डा उठ जावेगा । यदि मूसाका खुदा अद्वैत और एक ठहरा तो हम लोग सब मनुष्य

कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश) · Page 1035 of 1367 · BharatKosha