कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)
Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)
by कबीर साहेब
Source: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (origin)
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Read in context५—पृथिवीकी पाँच प्रकृति—१ अस्थि, (हाड) २ मांस, ३ नाड़ी, ४ चर्म, (त्वचा) ५ रोम ।
इन्हीं तत्व गुण और प्रकृतियोंकी कच्ची देह बनी है इस कारण इसका देह हुआ । हंस देहसे उलटी यह स्थूल देह उत्पन्न हुई, इसी को मनुष्य नामक स्थूल देह कहने लगे इसके प्राप्त होतेही अहंकार उत्पन्न हुआ, इसने अपनेको सबका स्वामी समझा । सुषुप्तिसे उत्थित होतेही दृष्टि उठाकर देखनेसे अपनी छाया दीख पड़ी, वह स्त्रीके स्वरूपमें स्थित हुई । उसीका नाम इच्छा हुआ । यह कामनाओंसे भरी हुई है । यह जीव एकसे दो हुआ इसी कारण नाम ब्रह्म और माया हुआ । दोनोंके संयोगसे स्त्रीको गर्भ रहा उससे तीन पुत्र उत्पन्न हुये, ब्रह्म अन्तर्धान हुआ ।
स्थूल सृष्टि ।
इस जीवसे मन उत्पन्न हुआ, ज्योति मनसे हुई, ज्योतिसे तीनों गुण प्रगट हुए. रजोगुण ब्रह्मा, सतोगुण, विष्णु, तमोगुण शिव हुआ. इस प्रकार यह जीव पक्केसे कच्चा हुआ । पीछे चौरासी लाख योनिकी कल्पना की । आपही आप सब योनियोंमें प्रवेश कर रहा है, आपही जगत है आपही ईश्वर है । अज्ञानताके कारण अपने आपको नहीं जान सकता । अविद्याके भवचक्रक्रममें पड़कर अन्धकारमें बन्ध हो गया । अज्ञान हुआ, अब व्याकुल होकर विचार करने लगा कि, मेरा कर्त्ता दूसरा कोई है । भिन्न कर्त्ताके निश्चय करतेही मिलनेकी इच्छा बढ़ी । अब तो जप, योग, तप आदिक नाना प्रकारकी युक्तियाँ करने लगा पर सफलता नहीं हुई । कुछ तेदेख नहीं पड़ा, तो कहने लगा मेरा ईश्वर निर्गुण निराकार है । वह बेचून बेचरा किसी प्रकार जाना नहीं जा सकता । उसी बेचून बेचराके वर्णनमें सर्व वेद, शास्त्र ग्रन्थ, किताब आदि बनाए । ब्रह्मा, विष्णु, शिव आदिको भी उसकी पहचान नहीं हुई । कभी कहता है निर्गुण, कभी कहता है सगुण ऐसे भ्रम और धोखेमें पड़ा । यह तो हिन्दुओंका सिद्धान्त हुआ ।
मुसलमानोंका सिद्धान्त सुनो अर्थात् नहीं खुदा, है खुदा, सब धोखे और भ्रमका कलमा पढ़ने लगे ।
इस प्रकारसे जगतसे ईश्वर, ईश्वरसे जगत्, ऐसे नाना सिद्धान्त बनने लगे । सब मनुष्य भ्रममें पड़कर अविद्याके अन्धकारमें भटक रहे हैं । किसीको कुछ भी नहीं सूझता न पता लगता है । इस जीवको कहीं शान्ति नहीं मिलती सब प्रकार दुःखही दुःख उठा रहा है ।
यदि किसी पर विश्वास करे तो उसका खण्डन हो जाता है, न विश्वास