कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)
Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)
by कबीर साहेब
Source: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (origin)
Page 1352 of 1367
Read in contextजुजसायः कदम तेरे न इनसाँका गुजारा ।
तदवीर नहीं तेरी शरणका है सहारा ॥
लिखते तेरी औसाफ लगे बहर किनारा ।
दिल विदः रौशन करे मजमूं हमारा ॥
पैदा कलम हरकत तुझ दीदः दमसे ।
सब इल्म व अमल वर्कत सतगुरुकी कदमसे ॥
है कौनसा बाजार तेरा इश्क जहां है ।
है कौन फिरोशिन्दः खरिदार कहाँ है ॥
हमराज कोई आशिक जान वाज वहाँ है ।
जिस रम्जकी फहमीदको सर सिदकः शहाँ है ॥
सो हाथ लगे काइ न दीनार दिरम से ॥
सब इल्मों अमल वर्कत सतगुरुकी कदमसे ॥
आई है जहाँ जेह्लि सो खुरशौद झलक है ॥
सब तारफना जरः पानूर झलक है ॥
उमीद न कुछ आदम और जिन्ने मलिक है ॥
है जान अमान बख्श तुही फितनः फलक है ॥
जुज तेरे न महरम कोई इनसानके धरमसे ॥
सब इल्मों अमल बरकत सतगुरुकी कदमसे ॥
तू रहबर हो जिसकी करे रहनुमाई ।
फिलफौर सोई खुदमें लिया देख खुदाई ॥
हरजा तू है तुही है तुही अर्ज स्वामी ।
सदहा खाते गोता न इसरार सों पाई ॥
है फजल तेरा आजिजकी दीदः नमससे ।
सब इल्म व अमल वर्कत सतगुरुकी कदमसे ॥
सत्यकबीर धर्मका मूल ।
<table> <tr> <td>ईश्वर</td> <td>...</td> <td>...</td> <td>सत्यपुरुष ।</td> </tr> <tr> <td>आचार्य</td> <td>...</td> <td>...</td> <td>कबीरसाहब ।</td> </tr> <tr> <td>गुरु</td> <td>...</td> <td>...</td> <td>पारख ।</td> </tr> <tr> <td>शास्त्र</td> <td>...</td> <td>...</td> <td>स्वसंवेद ।</td> </tr> <tr> <td>मार्ग</td> <td>...</td> <td>...</td> <td>निर्वाण ।</td> </tr> <tr> <td>चाल</td> <td>...</td> <td>...</td> <td>सतोगुणी ।</td> </tr> </table>