कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)
Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)
by कबीर साहेब
Source: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (origin)
Page 261 of 1367
Read in contextतेजस्वरूप व्यक्ति हजरत जिबराईल थे । उस धर्मके धुरीण विद्वानोंमें मतभेद है—एक मण्डली उनमेंको कहती है कि, यह तेजस्वरूप व्यक्ति जिबराईल फिरशतः नहीं बरन् रवगम् जगदीश्वर था । सुतरां काजी बंजाबी लिखता है —
وَقِيلَ الصَّابِرُ كَلِمَا اللَّهُ تَعَالَى وَهُوَ الْعَزِيزُ الشَّكُورُ وَهُوَ الرَّزِاقُ وَهُوَ الْمَتِينُ
अर्थात् सब ज़मीर खुदाके निमित्त हैं और तात्पर्य है महाबलसे जिसका अर्थ है—बड़ा बलवाला । जैसे कि कुरानमें विवरण हुआ (अन्नदाता और सायब कूवतमतीं) अर्थात् दूध बलका स्वामी ।
मोआलिम तफ़सीर सूरत नजममें यह लिखता है —
وَأَخْلَفُوا فِي الدُّنْيِ رَأْسَهُمْ
अर्थात् और लोगोंने मतभेद किया है कि, मुहम्मदने देखा वह क्या था ।
فَقَالَ نَاسٍ جَبْرَئِيلَ وَصَوُّقُوا ابْنَ مَسْعُودٍ وَعَائِشَةَ
तब कहा एक मंडलीने कि, उसने देखा जिबराईलको और यह कथन इब्न मसऊद आयशःका है ।
وَقَالَ آخَرُونَ هُوَ اللَّهُ مَزَجَلُ
अर्थात् कहा औरोंने कि वह (जिसको देखा मुहम्मदसाहबे) अल्लाह इजक अल्ल था ।
ثُمَّ أَخْلَفُوا فِي رَأْسِهِ فَقَالَ بَعْضُهُمْ جَعَلَ بَصَرَهُ وَفَوَّادَ وَهُوَ قَوْلُ ابْنِ عَسَاكِرِ
अर्थात् पुनः मतभेद किया लोगोंने परमेश्वरके देखनेके विषयमें अर्थात् परमेश्वरको जो देखा तो किस प्रकार देखा, निदान कहा कुछ मनुष्योंने कि, अवश्य परमेश्वरने दृष्टि दी, उसके हृदयमें अर्थात् उसके हृदयचक्षु खोल दिये, निदान देखा उसने हृदयसे यह इब्न अब्बासका कथन है ।
फिरतवातर लेखकोंका अनुवाद करनेके उपरान्त मुआलिममें यह कथन इब्न अब्बासका लिखा है —