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कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)

by कबीर साहेब

Source: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (origin)

Devanagarihipublished1,367 pages

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इक्कीसवाँ प्रकरण ।

सातवें साहूतमुकामका वर्णन ।

यह स्थान साहूत, बाहूतसे पाँच असंख्य योजन ऊँचा है। बाहूत और साहूतके बीचमें पाँच असंख्य योजन ख़ला और अत्यंत अंधकार है। यह इच्छापुरुषका स्थान है। इस स्थानकी सुन्दरता तथा यहाँ की सुख-सामग्रीका विशेष विवरण है। इस स्थानको कबीर साहब मुहम्मद साहबको दिखलाकर आगे चले।

बाईसवाँ प्रकरण ।

आठवें राहूत मुकामका वर्णन ।

राहूत स्थान साहूतके चार असंख्य योजन ऊपर है। साहूत तथा राहूतके बीचमें चार असंख्य योजन ख़ला और अत्यंत अंधकार है। इस राहूत स्थानमें अंकुर पुरुष अपनी शक्ति सहित रहते हैं, अत्यंत सुन्दर तथा मनोहर स्थान है, जब कबीर साहब मुहम्मद साहबको लेकर इस स्थानमें पहुँचे तो, उसके सब गुण दिखलाकर आगे चले।

तेईसवाँ प्रकरण ।

नववें आहूत मुकामका वर्णन ।

हाहूत राहूत दो असंख्य योजन ऊपर है बीचमें ख़ला (पोल) तथा अंधकार है, इस स्थानमें सहज पुरुष रहते हैं, सत्यपुरुषके सबसे बड़े पुत्र यह कहलाते हैं। यह नववां स्थान सबसे सुन्दर और आनन्दका कहलाता है। कबीर साहबने मुहम्मद साहबको वह स्थान दिखलाया और उसका विवरण करके फिर आगेको चले।

चौबीसवाँ प्रकरण ।

दशवें जाहूत मुकामका वर्णन ।

आहूत और जाहूतके बीचमें दश असंख्य लाख योजनका अन्तर है अर्थात् स्थान जाहूत आहूतके ऊपर दश असंख्य लाख योजनपर है, यही स्थान सत्यपुरुषका है, इसकी सुन्दरताका वर्णन किया जा नहीं सकता है, इसी स्थानसे कबीर साहब सत्यपुरुषकी आज्ञा लेकर पृथ्वीपर आया करते हैं। आप इसी स्थानके अहदी रसूल पाक हैं।