BharatKosha
कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)

by कबीर साहेब

Source: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (origin)

Devanagarihipublished1,367 pages

Page 361 of 1367

Read in context
Page 361

पधारना हुवा करता है। अनेक बार तो वे स्वतः गरुड पर आरूढ़ होकर दौड़ते हैं, तुरंत उस स्थान पर पहुँच जाते हैं। सामर्थ्यभर उस विपत्तिको दूर करते हैं, कभी २ वह जन्म लेता है। जैसे राम कृष्णके अवतार धरकर दैत्योंको मारता है। जब दैत्य बलिष्ठ होते हैं तब विष्णु देवताओंकी सैन्य लेकर इनके साथ समर करता है। सामर्थ्यभर उनको मारकर भगा देता है। मर्यादा वश पराजित होता है तो स्वयम् भाग जाता है। यही विष्णु महाराज सारे संसारको आजाएँ देते हैं। सांसारिक तथा धार्मिक ऋषीश्वरोंको समस्त मर्म सिखलाते हैं। ऋषीश्वर राजाओंको बतलाते हैं, राजालोग अपनी समस्त प्रजामें वही नियम प्रचलित करते हैं, वेद पुराण सभी इसी विष्णुको जगत्का कर्ता-धर्ता मानकर, परमेश्वर कहके प्रशंसा किया करते हैं। ब्रह्मा शिव इन्द्र इत्यादि देवता सब ऋषीश्वर इसी विष्णुके प्रभुत्वकी ओर समस्त भविष्यवक्तागण इत्यादि इसी परमेश्वरकी साक्षी देते हैं। आदम, नूर, इबराहीम, इसहाक, याकूब, मूसा, ईसा और मुम्मद इत्यादि इसी परमेश्वरकी प्रशंसा करते आए हैं। सबके पथ-प्रदर्शक येही विष्णु महाराज हैं। निर्गुण तथा सगुण दोनों रूप आपहीके हैं। सबके सब इसी दिव्यदेह ईश्वरकी वन्दना बराबर करते आते हैं। समस्त धर्मोंके रचयिता येही विष्णु महाराज हैं। शिवके धर्म पृथक् हैं। और वे भी विष्णुकी परामर्शक साथ हैं और कर्मकाण्ड तथा मीमांसा सब ब्रह्माकी ओरसे हैं। परन्तु वह सब विष्णुकी कामनाके साथ हैं। इस जगत्की समस्त कलें विष्णुके हाथमें हैं। विष्णुहीको अधिकार मिला है।

आद्या और निञ्जनके पुत्र विष्णुमहाराज तीनों लोकोंके ठाकुर एवम् अपने माता पिताकी प्रतिमूर्ति हैं। येही चक्रवर्ती महाराज एवं भवसागरके प्रबन्धक हैं, अत्यन्त बलिष्ठ तथा प्रभावशाली हैं, वैरियोंके दमन करनेके निमित्त सदैव अस्त्र शस्त्रसे सुसज्जित रहते हैं, आपका शाङ्गधनुष और खड्ग नन्दक है, गदा कौमोदकी तथा चक्र सुदर्शन हाथमें है। ये शस्त्र ऐसे भयानक हैं कि इनके अवलोकनसे ही भयके मारे दुष्टोंका प्राणान्त हो जाता है। ऐसाही चक्र सुदर्शन है कि, जिधरको छूटे उधर भस्म करदे। ऐसाही गदा कौमोदकी और नन्दक अस्त्र है कि, जिसको देखतेही वैरोंके प्राण निकल जाएँ। यह नीलवर्ण घनश्याम (मूसाका आसमानी रङ्गका खुदा) समस्त मनुष्योंपर कृपादृष्टि रखता है, अत्याचारियोंको धूलमें मिला देता है, जिनपर अत्याचार किया गया है उनको सत्व देता है। जब कभी दैत्यों और राक्षसोंकी लड़ाईमें वरदान आदिके कारण कठिनाता पड़ती है तब आपकी माता आदिश्वानी सहायता

कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश) · Page 361 of 1367 · BharatKosha