BharatKosha
कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)

by कबीर साहेब

Source: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (origin)

Devanagarihipublished1,367 pages

Page 362 of 1367

Read in context
Page 362

करती है, जो कठिनाई आद्यासेभी न टले उसके निमित्त निरञ्जनकी ओरसे आज़ा होती है। जो निरञ्जनके भी बशसे परे हैं वह सत्यपुरुषके कृपाकटाक्षसे ठीक हो जाती है। जब सत्यपुरुषकी दया होती है तब समस्त कठिनाइयों निवृत्त हो जाती हैं, जैसे जगन्नाथके मन्दिर स्थिर रखनेमें इस कठिनाईको निवृत्त करना निरञ्जनके बशकी बात नहीं थी। तथा स्वयम् सत्य पुरुषने मन्दिर खड़ा किया। समुद्रको हटा दिया जब समस्त देवता तथा ऋषि मुनि इत्यादि दैत्यों और राक्षसोंसे सताये जाते हैं और दुःख पाते हैं तब समस्त देवता मिलकर ब्रह्माके पास जाते उस समय विष्णु, ब्रह्मा, शिव इन्द्रादिक देवताओंको अपने साथ लेकर दैत्योंके साथ युद्ध करके उनका विनाश करते हैं, देवताओंको सुख देते हैं। सुतरां यही परमेश्वर सबका प्रतिपालक और तीनों लोकोंका प्रबन्धकर्ता है। संसारकी रक्षा करनेमें यह अपनी सारी शक्तियोंका उपयोग करता है।

शेर—यह नीर वरन घन यही बनाजो अदा।

यह खुदा है यह खुदा है यह खुदा है खुदा ॥

सुर मुनि जिसे गाते हैं कहे वेद बदीय।

यह सदा है यह सदा है यह सदा है पर सदा ॥

यही सगुण यही निर्गुण यही बेचूँ वचरा।

यह नदा है यह नदा है यह नदा है यह नदा ॥

है यह हमः मौजूद व हाज़िर नाज़िर।

न जुदा है न जुदा है न जुदा है न जुदा ॥

यही रज्जाक व कज्जाक है आयन्दः व हाल।

यह बदा है यह बदा है यह बदा है यह बदा ॥

पहचान अलग उससे हो उसपर आजिज।

यह फ़िदा है यह फ़िदा है यह फ़िदा है यह फ़िदा ॥

यह विष्णु अपने सूक्ष्म शरीरसे तो प्रत्येक वस्तुमें उपस्थित है और चारों खानके जीवोंमें घुस रहा है। ऐसेही ब्रह्मा शिव शक्ति तथा निरञ्जनको भी मानना चाहिए। जो कुछ समस्त ब्रह्माण्डमें दिखाई देता है, वह कुछ अपने शरीरमें जानना चाहिए। यह कबीर साहबका वचन है कि, विष्णु चारों खानेके जीवोंमें पूर्ण हो रहा है। विष्णुविहीन कोई स्थान नहीं है। इसीके अनुसार वह श्लोक पढ़ो कि—

जले विष्णुः स्थले विष्णुविष्णुः पर्वतमस्तके।

ज्वालामालाकुले विष्णुः सर्वं विष्णुमयं जगत्।

कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश) · Page 362 of 1367 · BharatKosha