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कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)

by कबीर साहेब

Source: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (origin)

Devanagarihipublished1,367 pages

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कबीर साहिब कहते हैं कि, गुडखाया हुआ गूंगा स्वाद नहीं बता सकता, खाली इसारेसे ही कह सकता है।

शब्द ३९—ऐसो हरिसों जगत लरतु है, पंडुर कतहूँ गरुड धरतु है ॥ १ ॥

मूस बिलासी कँसे हेतू, जम्बुक करके हरिसों खेतू ॥ २ ॥

अचरज यक देखा संसारा, सोनहा खेद कुंजर असवारा ॥ ३ ॥

कह कबीर सुनों सन्तो भाई, यह सन्धि कोई विरले पाइ ॥ ४ ॥

ऐसे भगवान् दयालु जो अनायासही मुमुक्षु जीवोंके रक्षक हैं। पाप जीव इनसेभी विरोध किये बिना नहीं मानते। व्यर्थकी निन्दा करते हैं। क्या पीला सोंप गरुडको खालेना चाहता है ? जो विष्णुकी निन्दा करके अपना महत्त्व प्रकट करते हैं, वे सीधे सीधे पुरुषोंको बहकाकर ऐसे हजम करना चाहते हैं जैसे बिल्ली मूसेको खालेना चाहे। पर ये सब बातें इसी तरह हैं जैसे कि, श्यार शेरसे लड़नेका इरादा करे। श्रीविष्णु रहित जीवोंको वे क्या उमराह कर सकते हैं। हमने एक बड़ा आश्चर्य देखा कि, कुत्ते हाथीपर चढ़कर उसे चलाना चाहते हैं। यानी ऐसी बँसी गप्योंसे विष्णु भक्तोंको भक्तिसे डिगाना चाहते हैं। कबीर साहिब कहे हैं कि, किसी विरलेको विष्णुका साक्षात्कार हुआ है जिससे सत्य लोककी प्राप्ति हो जाती है ॥

भगवान् रामचन्द्रजी महाराज ।

मनु और शतरूपाका विवरण रामायणमें कहा है। कि, इन दोनोंने बड़ी तपस्याकी है। अस्सी सहस्र वर्षपर्यन्त प्रार्थना करते रहे, इसके उपरान्त ब्रह्मा इनके सामने गए। परन्तु मनुके पीछे खड़े होकर कहने लगे कि ए, राजा वर माँग। तब मनुने कहा कि, तुम मेरे सामने आओ। तब ब्रह्माने कहा कि, ए राजा ? तेरे प्रतापके कारण मैं तेरे सामने नहीं आ सकता हूँ। तब राजाने कहा कि, यदि तुमसे मेरे सामने आया नहीं जाता तो मैं तुमसे क्या माँगूँ ? फिर शिवजी आए वे भी ब्रह्माहीके सद्गुण पलट गए। पीछे विष्णु आए और कहा कि, राजा तू माँग क्या चाहता है। तब मनुने अपने नेत्र खोलकर देखा तो विष्णु महाराज शंख चक्र गदा पद्म इत्यादि लिए सामने खड़े हैं। तब राजाने कहा कि, तुम्हारे सद्गुण मेरा पुत्र उत्पन्न हो। तब विष्णुने कहा कि, मेरे सद्गुण दूसरा कौन है मैं स्वयम् तेरा पुत्र होऊँगा और कुछ माँग। तब राजाने कहा कि, दूसरा वरदान यह दो कि, मैं आपसे जुदा होकर जीवित न रहूँ, भगवान् विष्णुने 'एव मस्तु' कह दिया। वेही मनु और शतरूपा राजा दशरथ और महारानी कौशलया हुए। भगवान्ने जो वरदान दिया था उसके अनुसार उनके घरमें भगवान् रामका