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कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)

by कबीर साहेब

Source: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (origin)

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मनुष्यका । जो कोई गर्भमें आवेगा वो सब दुःख उठावेगा, उत्पत्ति और मृत्युके समय आपने कैसा दुःख पाया था । यह अपने वशकी बात नहीं बरन् विश्व होनेकी बात है । प्राण देनेके समय आपको कैसा दुःख जान पडा । मृत्युसे कैसे भयभीत हुए कि, पुकार कर कहा । देखो मतीकी इञ्जीलका (२७) बाब (४६) आयत (एली एली लमासतक बानी) अर्थात् तू ए मेरे परमेश्वर ! से मेरे परमेश्वर ! ! तूने मुझे क्यों छोड़ दिया (५०) आयत ईसूने बडे जोरसे चिल्लाकर प्राण त्यागे ।

फिर मरक्कसका (१४) बाब और (३३) आयत, पीटर्स याकूब योहन्नाको ईसाने साथ लिया । वह घबराने और बहुत उदास होने लगे ।

(३५) इसने थोड़े आगे जाकर पृथ्वीपर गिर प्रार्थनाकी कि, यदि होसके तो यह घडी मुझसे टल जावे ।

(३६) कहा कि, ए पिता ! तुझसे सब कुछ हो सकता है इस प्यालेको मुझसे टालदे लूकाकी इञ्जीलका (२२) बाब (४२) आयत ए, पिता ! यदि तू चाहे तो यह प्याला मुझसे टल जावे परन्तु मेरी इच्छा नहीं बरन् तेरी इच्छाके अनुसार है ।

(४३) आकाशमें उसे एक दूत दिखलाई दिया जो उसको बल देता था ।

(४४) मृत्युके कष्टसे विह्वल होकर बहुत गिड़गिड़ाकर परमेश्वरसे प्रार्थना करता था, उसका पसीना रक्तके बूंदके सदृश पृथ्वीपर गिरता था ।

उन बातों से प्रगट होता है कि, वे महाशय अपनी मृत्युसे भयभीत होते थे परन्तु मारे जानेके वश नहीं था । मृत्युके समय दूत आपको सन्तोष दे रहा था । इससे आपके मनमें बड़ा ढाढ़स था । जो कोई माताके गर्भसे उत्पन्न होता है कोई निरापराध नहीं तथा निर्दोष नहीं मारा जा सकता है । देखो पुराना अहमदनामा इस्तसनाकी पुस्तक । (१८) बाब (२०) आयत वह भविष्यद्वक्ता जो ऐसी धूण्टता करे कि, कोई बात मेरे नामसे कहे कि, जिसके कहनेकी आज्ञा मैंने नहीं दी, अथवा अन्यान्य परमेश्वरोंके नामसे कहे तो भविष्यद्वक्ता मारा जावेगा ॥

(१) सला तीन (८) बाब (६४) आपत कोई मनुष्य ऐसा नहीं जो कि, दोषी न हो । मईकी नबीकी पुस्तक (७) बाब (२) आयत बनी, आदममें कोई सत्यवादी नहीं । रोमियोंका (३) बाब (१०) आयत, कोई सत्यवादी नहीं ॥