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कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)

by कबीर साहेब

Source: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (origin)

Devanagarihipublished1,367 pages

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युसायाहनबी (६४) बाब (६) आयत, हमतो सबके सब ऐसे हैं जैसे कोई घृणित पदार्थ हमारी समस्त सत्यता गन्दी धज्जीके समान है।

अयूबका (९) बाब। (२) आयत मनुष्य परमेश्वरके समक्ष किस प्रकार सत्यवादी ठहरेगा? अयूबका (२५) बाब (२) आयत परमेश्वरके समक्ष मनुष्य किस प्रकार सत्यवादी समझा जावे? वह जिसकी उत्पत्ति स्त्रीसे है यह किस प्रकार पवित्र ठहरे?

अयूबका (१४) बाब (१) से (५) आयतपर्यन्त मनुष्य जो स्त्रीगर्भसे उत्पन्न होता है वह अल्पकाल पर्यन्त जीवित रहता है। पूर्णतया दुःखमें है। वह पुष्पके समान निकलता और तोड़ा जाता है। वह छायाके समान जाता रहता है। नहीं ठहरता है क्या इसीपर अपनी आँखें खोलता और मुझे अपने साथ न्यायालयमें लाता है।

कौन है जो अपवित्रसे पवित्र निकाले? कोई नहीं।

अयूबका (१५) बाब (१४) आयत, मनुष्य कौन है कि, जो पवित्र होसके वह जो स्त्रीसे उत्पन्न हुवा, वह कैसे सत्यवादी ठहरे?

मरकसकी इज्जील (१०) बाब (१७) (१८) आयत। भला कोई नहीं वरन् एकभी नहीं, अर्थात् एक परमेश्वरही भला है।

मतीकी इज्जील (१९) बाब (१६) आयत। ऊपरकी बात लूकाकी इज्जील (१८) बाब (१८) वही बात।

इज्जीलका पोलूस भविष्यवक्ताका दूसरा पत्र (२) करनतियोंके (१३) बाब (४) आयतमें लिखा है कि, ईसा निर्बलताके कारण सलीबपर मारा गया।

फिर पोलूस भविष्यवक्ताका पत्र फिलपियोनको (१) बाब (१७) (१८) आयत, प्रेमवाले यह जानकर इज्जीलको सुनाते हैं कि, मैं इज्जीलको प्रमाणित करनेके निमित्त नियत हुवा हूँ। अतः क्या है? सब प्रकारसे मसीहका समाचार दिया जाता है। चाहे मक्कारी हो चाहे सत्यतासे हो। मैं इसमें अप्रसन्न नहीं हूँ वरन् प्रसन्न रहूँगा।

अट्ठारह करोड़ साठ सहस्र योजन पृथ्वीसे ऊपर आकाशमें हजरत ईसा रहते हैं। इस स्थानका नाम जिब्रूत है और वही झाँझरी द्वीप समस्त सृष्टिके सन्नाद् निरञ्जनकी राजधानी है, उसीकी सभामें चारों दूत और सिद्ध साधु उपस्थित रहते हैं।

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