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कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)

by कबीर साहेब

Source: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (origin)

Devanagarihipublished1,367 pages

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तेरह मंत्र हैं और अथर्वणमें सात मंत्र हैं। वेदने इसी पुरुषको परमात्मा रचयिता और समस्त संसारका राजा कहा है।

सहस्रशीर्षा पुरुषः सहलाक्षः सहलपात् ।

सभूमि ठं. सर्वत स्पृत्वाऽत्यतिष्ठद्दशांगुलम् ॥ १ ॥

जो यह अनेकों शरीरोंवाला तथा अगणित ज्ञानेन्द्रिय और कर्मेन्द्रियवाला विराट् दीख रहा है यह उसके स्वरूपसे भिन्न नहीं है। जिसके भीतर यह विराट् विलास कर रहा है वो इस जैसे शरीरोंमें नाभिसेबारह अंगुल ऊंचे हृदयमें विराजा हुवा है यद्यपि यहां खुलासा नहीं कहा है तथापि पांचवें मंत्रमें जो यह कहा है कि, "ततो विराडजायत" इससे मालूम होता है कि, विराट्का उत्पादक दूसरा ही है। अनेकों शिरपाद आदि विराट्में ही देखे जाते हैं, इस कारण यह पता चलता है कि, यहां कार्यमुखसे कारणका विचार चला है। भागवत आदि ग्रन्थोंमें भी यही लिखा है कि—'आद्योऽवतारः पुरुषः परस्य' यानी, यह विराट् उसका पहिला अवतार है।

(२) मंत्र—यह समस्त परमेश्वरही संसार है जो कुछ बीत चुका वही है और जो कुछ होगा वही है। वही मोक्षका मालिक है। उसीकी कृपासे भोग भी मिल जाते हैं।

सायनाचार्य—जो कुछ भूतपूर्व था परमेश्वर था। जो कुछ अब है परमेश्वर है। इस समय भूतपूर्वकालकी शरीरें परमेश्वरही थीं। जो कुछ भविष्यत्कालमें होगा सब परमेश्वर है। वह समस्त देवताओंका देवता है। उस वस्तुसे जो लोग खाते हैं वही बढ़ रहा है। मायाके कारण वस्तुओंका स्वरूप और का और दीख पड़ता है। परन्तु प्रत्येक वस्तु परमेश्वर है। भोग मोक्ष भी उसीकी कृपासे होते हैं।

(३) मंत्र—संसारमें जो था जो है तथा जो होगा वो समस्त उसके तेजकी परछाई मात्र है। इससे पृथक् जो हम देखते हैं वही है। समस्त सृष्टि उसका एक चौथाई भाग है और शेषके तीन भाग आकाश मुक्तिस्थान सत्यलोकमें है जहां सत्य कबीर पहुँचाते हैं।

इस प्रकार समस्त मंत्रोंके साथ चारों वेद इसकी प्रशंसा बराबर करते हैं कि, तूही सबका रचयिता तथा भोजन पहुँचानेवाला है तुझसे पृथक् और दूसरा कोई नहीं है। इसीके अवतार विराट्की देहमें समस्त रचना समा रही है। इस विराट्हीके शरीरका नाम भवसागर है। वेदके किनारे पर तो विराट्पुरुष निर-ञ्जन बैठे हैं। लोकके किनारेपर आदि भवानी चौसठ लाख योगिनियोंकी सैन्य