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कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)

by कबीर साहेब

Source: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (origin)

Devanagarihipublished1,367 pages

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विचार नहीं करते। सुदर्शनजीने द्रौपदीके हृदयकी बातोंको जानकर अपने हाथको भोजनसे खींच लिया। केवल तीन ग्रास खाये अधिक भोजन नहीं किया हाथ धोकर चले, सुदर्शनजीने जो तीन ग्रास खाये थे इस कारण वह आकाश घण्ट तीनही बार बजकर रह गया, अधिक नहीं बजा। उस समय राजा युधिष्ठिरको फिर संदेह हुआ, कृष्णचन्द्रके पास जाकर कहने लगे कि, महाराज ! अब क्या करें ? सुदर्शनजीने भोजन किया तो भी घण्ट तीनही बेर बजा। किस अपराधसे पूरे सात बार नहीं बजा ? महाराज ! कृपा कर इसका कारण बतलाइये। कृष्णचन्द्रने कहा हे युधिष्ठिर ! रानी द्रौपदीने अपने मनके भीतर सुदर्शनजीकी खानेके समय निन्दा की कि, सुदर्शन अज्ञानीहै। भोजनके स्वादको नहीं जानता। इस कारण सुदर्शनजीने उसके अन्तःकरणकी बात जानकर खानेसे हाथ खींच लिया। तुम्हारी यज्ञ पूरी नहीं हुई इसलिये घण्ट नहीं बजा। अब तुम दौड़कर जाओ सुदर्शनजीके चरणोंपर गिरकर अपना अपराध क्षमा कराओ। प्रार्थना तथा निवेदन करके उनको फेर लेआओ। बड़ी मान भक्ति तथा नम्रतापूर्वक भोजन कराओगे, तब सात बार घण्ट बजेगा। सावधान, किसी प्रकारकी विभिन्नता न करना। इतनी बात सुनकर राजा युधिष्ठिर दौड़े गये और सुदर्शनजीके चरणोंपर गिरकर अत्यंत नम्रतासे कहने लगे कि, महाराज ! हमारा अपराध क्षमा करो, हम अज्ञानसे अंधे हैं, आपके भेदको नहीं जानते, अब चलकर हमारे घरमें फिर भोजन करो। जब राजाने बड़ी नम्रता की तब सुदर्शनजी पुनः दयालु हुए राजाके घर आकर पुनः भोजन किया। तब घण्ट सात बार आकाशमें आपसे आप बजा। चारों ओरसे जय जयकार ध्वनि होने लगी।

यह सब कबीर साहब धर्मदासजीसे कहते हैं कि:—

साखी-श्वपचभक्त^१^ भोजन कियो, घण्ट बजेउ अकाश^२^ ।

गण गंधर्व मुनि देवमें, जैजै होत^३^ प्रकाश^४^ ॥

चौ०-भोजन श्वपच कीन्ह जिउनारा^५^ । सात बार घण्टा झनकारा^६^ ॥

राय युधिष्ठिर चरनन परचो । पातक^७^ सकल^८^ भक्त^९^ मम^१०^ हरचो^११^ ॥

हम तो महा अधम अपराधी । कुटिल^१२^ कठोर^१३^ भक्ति नहीं राधी^१४^ ॥

अहो भगत हम बडे अभागी । कृपा कीन्ह मोहि कीन्ह सुभागी ॥

पांचों पाण्डव विनवैं^१५^ शूरा । भक्त प्रताप यज्ञ भा पूरा^१६^ ॥


१ सुदर्शन, २ अपने आप, ३ होती थी, ४ प्रत्यक्षमें ५ परोसी हुई वस्तुका, ६ बज गया, ७ पाप ८ सब, ९ हे सुदर्शन, १० मेरे, ११ दूरकर दिये, १२ कपटी, १३ कड़े स्वभावके, १४ सिद्ध की, १५ प्रणाम करे, १६ हो गया।

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