कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)
Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)
by कबीर साहेब
Source: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (origin)
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Read in contextसमय सब यहूदी सोनेका बछड़ा बनाकर पूज रहे थे । जब वह पर्वतसे नीचे उतरा कुछ पटिया लिखकर लाया । यहूदियोंको बछड़ा पूजता देखकर क्रुद्ध हुआ । और उन पटियोंको पटक दिया वे फूट गयीं अपने बड़े भाई हारूनकी दाढ़ी पकड़कर खींची ।
कुरानमें लिखा है कि, जब मूसाने झाड़ीमें आग लगी देखी तब उसने अपने घरवालोंसे कहा कि, मैं जाता हूँ इस झाड़ीसे आग लाता हूँ जब वह उसके समीप गया तब उसमेंसे आवाज आयी “ऐ मूसा ! मैं तेरा तेरे बाप दादोंका खुदा हूँ” । मूसा अनभिज्ञ था कि, वह खुदा था या आग थी ।
हजरत मूसा और खयाजा खिज्ज—फिर कुरानके सूरै कहफके (१५) सिपारः (९) रूकूअकी (५९) आयतसे (८१) आयत तक मूसा और खयाजा खिज्जका किस्सा बराबर चला है, मूसाने खिज्जसे कहा है कि, मैं तेरे साथ चलूंगा । तब खिज्जने कहा कि, मेरे साथ न चल. क्योंकि, तू मेरे साथ चलने योग्य नहीं । कारण यह कि, तेरी बुद्धि शुद्ध नहीं है, तू मेरे काय्योंमें हस्तक्षेप करेगा । तब मूसाने उत्तर दिया कि, मैं तेरे कार्यमें कदापि हस्तक्षेप न करूँगा । तू मुझे अपने साथ चलने दे । खिज्जने मूसाको अपने साथ लिया कहा कि सावधान, तू मेरे काय्योंमें कभी हस्तक्षेप न करना जबतक मैं स्वयम् तुझसे कुछ न कहूँ । तब कुछ दूर चलकर दोनों एक नावपर सवार हुए । खिज्जने उस नावको फाड़ डाला । मूसाने कहा कि यह तूने क्या किया यह काम अच्छा नहीं किया । नाव फाड़कर तू लोगोंको डुबाया चाहता है तब खिज्जने कहा कि, क्या मैंने तुझसे पहले नहीं कहा था कि, तू मेरे, साथ चलने योग्य नहीं । क्योंकि, तू मेरे काय्योंमें हस्तक्षेप करेगा । तब मूसाने प्रार्थना की कि, अबकी बार तो तू मेरा अपराध क्षमाकर, फिर मैं हस्तक्षेप न करूँगा । अबका प्रथमही अपराध हुआ है क्षमा करने योग्य है ।
फिर दोनों आगे चले । एक बस्तीमें एक लड़का मिला उसको खिज्जने मार डाला । फिर मूसा बोला कि, यह तूने क्या काम किया कि, एक निरपराध बालकको मार डाला । खिज्जने कहा कि, क्या मैंने तुझसे पहलेही नहीं कहा था कि, तू मेरे साथ चलने योग्य नहीं फिर मूसाने विनय भी कि, अबकी बार तो मेरा दोष क्षमा करो, अब मैं तेरे काय्योंमें हस्तक्षेप न करूँगा ।
फिर दोनों आगे चले । एक गांवमें पहुँचे । वहाँके मनुष्योंसे भोजन माँगा, किसीने न दिया । फिर खिज्जने उस गांवमें एक दीवार बनाई जो जीर्ण होकर गिरा चाहती थी । खिज्जने भली भाँति परिश्रम करके उस दीवारको उठा सुदृढ़ कर दिया । मूसाने कहा कि, यदि तू चाहता तो अपनी मजदूरी लेता । खिज्जने कहा