कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)
Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)
by कबीर साहेब
Source: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (origin)
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Read in contextकि, यह तीसरी बार है अब मेरी तेरी जुदाई है। अब जो जो काम मैंने किये हैं उसका तात्पर्य मुझसे सुन। जो नाव मैंने फाड़ डाली उसका तात्पर्य यह था कि, वह नाव मोहताजोंकी थी जो लोग परिश्रम करके अपना पेट पालते हैं। मैंने चाहा कि, मैं इसमें बाधा डालूँ, क्योंकि, उनसे परे एक बांदशाह है जो नावोंको छीन लेता है। इस कारण मैंने उसकी नाव फाड़ डाली कि, फटी नाव देखकर उसको छोड़ देगा, उस नावसे उस गरीबको बड़ा लाभ हुआ क्योंकि, सब आनेवाले मनुष्य उसकी नावपर चढ़कर पार हो गये। मैंने जिस बालकको मार डाला था उसका कारण यह है कि, इसके माता पिता भले थे। लड़का दुष्ट होकर भविष्यमें उनको बदनाम करता इस ध्यानमें मैंने उसका वध किया, जिसमें उसके माता पिता जो धर्मिष्ठ हैं सुख पावें। वह दीवार जिसको परिश्रम पूर्वक मैंने उठाया वह अनाथ बालकोंकी थी। उस दीवारके नीचे खजाना गड़ा था और वह दीवार गिरा चाहती थी। इस दीवारको परिश्रम पूर्वक मैंने इसलिये उठाया जिसमें वे लड़के जब युवावस्थाको पहुँचे तब उस गड़े खजानेको खोदकर निकालकर सुख पावें। क्योंकि, उन लड़कोंके माता पिता सुकम्मी थे। इन लड़कोंपर ईश्वरी कृपा थी, यह समस्त कार्य मैंने खुदाकी आज्ञासे किये थे। अपनी इच्छासे नहीं किया। खिज्जको परमेश्वरी बुद्धि सागरका एक बूँद मिला था पर मूसाको कुछ नहीं मिला था। मूसा मिश्री भाषामें पुस्तकें पढ़ाया। सुन्दर सुदृढ़ तथा बलिष्ठ था।
मूसा और मौत—मैंने किसी मुहम्मदी पुस्तकमें पढ़ा था कि, मूसाकी मृत्युका संदेशा लेकर मलकुलमौत उनके पास आया। मूसासे कहा कि, मैं तुम्हारी जान निकालने आया हूँ। तब मूसाने एक तमोंचा खींचकर उस इजराईल फिरिस्ते को ऐसा मारा कि, एक आँख फूट गयी। वह खुदाके समीप दोहाई मचाता गया कि मूसाने मेरी एक आँख फोड़ दी।
मुहम्मदसाहिब और मुहम्मदे गिजाली
मुहम्मद गिजालीको मुहम्मद साहब लाहूत स्थान ले चले। पहले मलकूत स्थानको गये। वहाँ मूसासे साक्षात् हुए मुहम्मद गिजालीने मूसासे कहा कि हजरत आपने जो खुदाको आकाशके रङ्गका बताया खुदा की वह मूर्ति कहाँ है, यह बात सुनकर मूसाने मुहम्मद गिजालीको भी एक तमोंचा खींचकर मारा कोई उत्तर नहीं दिया। अतः मूसा शूर वीर तो था सोटे की विद्या तो मूसाको अवश्यही थी। वह अन्तर्यामी नहीं था इसलिये आवागमनका भेद भी नहीं जानता था।
७ हजरत दाऊद नबी—मूसाके पीछे दाऊद नबी प्रख्यात हुये। देखो दूसरी समवाईलके (११) बावसे दाऊदका सारा हाल लिखा है। एक दिवस आप