कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)
Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)
by कबीर साहेब
Source: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (origin)
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Read in contextसेवा किया करता था। एक दिवसकी बात है कि, सुलेमान सो गया था एक सौपने आकर सुलेमानके सिरपर अपना फण पसार दिया था। यह हाल उस मल्लाहकी बेटीने देख लिया। तब उसने जान लिया कि, यह हमारा नौकर कोई प्रतिष्ठित तथा बड़ी ममर्यादाका मनुष्य है। तब उसने अपने पितासे कहा कि, पिता ! मेरा विवाह इसके साथ कर दो। मल्लाहने कहा कि, हे बेटी ! यह तो हमारा सेवक है इसके साथ तू क्यों विवाह किया चाहती है ? अनेक मल्लाह हैं किसी अच्छे मल्लाहके पुत्रके साथ कर दूँगा। उस लड़कीने यह बात अस्वीकार की उसका विवाह सुलेमानके साथ हुआ, विवाह हो गया। तब उसदिनसे वह मल्लाह दो मछलियाँ दिया करता। एक सुलेमान और दूसरी अपनी पुत्रीको, वह मल्लाह भड़ भूजेका कामभी करता था। उसकी लड़की भाड़ झोंकती थी। सुलेमान भी झोंका करता था। एक दिवस ऐसी घटना हुई कि, उसने अपनी पुत्री तथा दामादको दो मछलियाँ दीं। जब उन्होंने मछलियोंको चौरा तो जो उस लड़कीके भागकी मछली थी उसके पेटसे सुलेमानकी वही अंगूठी निकल पड़ी सुलेमानने उस अंगूठीको पहचानकर अपनी उँगलीमें पहनली।
अब इधरका हाल सुनो कि, जब वह देव मुलेमानका स्वरूप धारण करके बादशाहत करने लगा, तो कुछ दिवसोंतक तो उसने राज्य किया। इसके पीछे शाही चाकरों तथा बेगमोंने उसकी आदतें सुलेमान बादशाहकी आदतों विरुद्ध पाईं, तो जान लिया कि, यह हमारा बादशाह नहीं है बरन जिसको हमने मारकूटकर निकाल दिया था वही सुलेमान बादशाह था, यह कोई देव वा धूर्त है जो सुलेमानका स्वरूप धारण कर सिंहासनारूढ़ हुआ है। सब कारबारी सुलेमान को दूँढ़ने लगे। जब उस दुष्ट देवने देखा कि, यह सब सुलेमानको दूँढ़ रहे हैं मेरी धूर्तताको सब जान गये हैं, तो सिंहासन छोड़कर भाग गया। अंगूठीको नदीमें डाल दी। नदीमें पड़ते उसी समय उस अंगूठीको एक मछली निगल गयी। सब कर्मचारी तो सुलेमानको दूँढ़ते रहे वह देव कहीं छिप रहा। उधर जब सुलेमानने वह अंगूठी पा उसे अपने हाथमें पहना तो उसी समय जिन तथा परियों उसकी चाकरी में आ उपस्थित हुईं। शाही सिंहासन आया, सुलेमान को बैठाया। सुलेमानने उस मल्लाहकी छोकड़ीको अपने साथ सिंहासनपर बैठाया, वह आकाशको उड़ा, उसकी राजधानीमें जा पहुँचा। जब सुलेमान अपनी राजधानीमें पहुँचा तो पहिलेकी तरह राज्य करने लगा।
घृणाकी दृष्टिसे देखनेका फल सुलेमान बादशाहका सिंहासन एक समय आकाशमें उड़ा जाता था, उस समय उसने मल्लाहकी लड़कीको कुरूपा