कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)
Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)
by कबीर साहेब
Source: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (origin)
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Read in contextप्रशंसा की वह वाक्य खुदाकी ओरसे नहीं था वरन् शैतानने वह बात मेरी जिह्वा-पर डालदी थी । उस वाक्यको कटा हुआ जानो क्योंकि, वह शैतानका वाक्य था । इस प्रकार शैतानी मिलावटके कारण कुरानकी बहुतसी आयतें कट गयी हैं । जिनका वृत्तान्त तफसीर मुआलि मुत्तनजीलमें लिखा है ।
समीक्षा—अब यहाँ प्रमाणित हुआ कि खुदा तथा खुदाके रसूल दोनों शैतानसे भयभीत रहा करते थे । खुदा सत्तर सहस्र चौकीदार आयतके साथ भेजा करता था । जिबराईलका भी कुछ विश्वास न था कि, वह अपनी ओरसे वहीमें कुछ मिला न दे इस चौकसी तथा सावधानीके होते रहने पर भी शैतानकी विजय होती है । वह वही तथा पैगम्बरोंकी जिह्वापर अपनी बात डाल देता है । उसकी मिलावटसे खुदा और रसूल दोनों डरा करते थे । तब बताइये कि, उनकी शक्ति तथा मुक्ति किस काम आई ।
विशेष—यहाँतक तो मैंने बहुतही संक्षेपमें सब नबियोंका हाल लिखा है एवं उनकी विद्याका वृत्तान्त प्रगट किया है । जो कोई उनकी जीवनी देखेगा वह अनेक बातोंसे विज्ञ हो जायगा कि, इन नबियोंको कैसा ज्ञान था किस प्रकारकी विद्यासे संसारवालोंको उपदेश दिया करते थे । जितने बड़े बड़े नबी बीते हैं वे येही हैं, उनके अतिरिक्त जितने नबी और बीचमें हुये हैं उनका विवरण व्यर्थ है । इन सब नबियोंको खुदाकी ओरसे बल तथा प्रकाश प्रदान किया जाता था । इसके द्वारा वे लोग मनुष्योंको उपदेश दिया करते थे । मृत्युके समय उनका सर्व प्रकाश विलुप्त हो जाता । वह दूसरी योनिमें चले जाते थे । परन्तु दूसरी देहमें पूर्वजन्मका परिश्रम कुछ सहायक होता शीघ्रही प्रकाशके अधिकारी हो जाते । किसीको मृत्युके समय प्रकाश पृथक् होता और किसीका प्रकाश उसी जीवनमें दूर हो जाता । सुतरां सावल नबी अपने जीवनमेंही बिना प्रकाशका हो गया था । एक स्त्री जिसका यार एक देव था उससे समाचार पूछता फिरा । उसमें तनिक भी ज्ञानकी ज्योति नहीं रही । देखो प्राचीन अहदनामा (१) समवाईलका (२८) बाब साविलका वृत्तान्त लिखा है । ऐसेही सब नबियोंको खुदाकी ओरसे उपदेश होता है तब विद्याका प्रदीप प्रकाशित होता है । फिर समय आनेपर बिना विद्या कभी हो जाते हैं योनि योनिमें आवागमन करते फिरते हैं जैसे घड़ीको फूक दी अथवा कलको हिला दिया जबतक उसका बल रहा तबतक चलती रही, ऐसे ही नबियोंका मन कभी प्रकाशित और कभी अन्धकारसे भर जाया करता है इसीका सार निम्न लिखित ग्रन्थलमें लिखते हैं ।