कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)
Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)
by कबीर साहेब
Source: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (origin)
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Read in contextनिर्दोष वही खुदाके पेंगम्बर के पास स्वच्छ पहुँचे, इसीलिये खुदाकी ओरसे बड़ी चौकसी हुआ करती थी। हजरत इब्रअब्बासका कथन है कि, जिबराईल कभी खुदाके पेंगम्बरके पास वही न लाया। उसके साथ साठ सत्तर सहल चौकीदार फिरिश्ते वहीकी रक्षार्थ साथ नहीं थे।
कुरानमें मूर्तिपूजा—मौलवी अमादुद्दीन कृत तवारीख, मुहम्मदीमें लिखा है कि, मुहम्मद साहबके नबी होनेके पाँचवें वर्षका हाल है कि, जब मक्का-वालोंसे मुसलमानोंका बैर हो गया तब मुहम्मद साहबने मुसलमानों तथा काफिरोंके सामने यह बात सुनाई। बुतोंकी प्रशंसामें सूरत नजममें यह बात उत्तरी (जैसा कि, स्वर्गवासी मास्टर रामचन्द्र सितारे हिन्द दिहलबीने आजाज कुरानमें लिखा है )
أَقْرَرُ نَيْمًا لِلَّاتِ وَالْعُرْزِي وَمِنْهُ الثَّالِثَةُ الْأَحْرِي
कि, “तुम देखते हो लात असी और मनात बुतोंको” उसके उपरान्त फर मुहम्मद साहबने इसी आयतके साथ यह भी पढ़ा है।
وَالْقَدْرُ مَا خَلَيْتَ مِنْهُ إِلَّا اللَّهُ تَعَالَى
कि, “तीनों मूर्तियों परम श्रेष्ठ हैं। इनसे मुक्तिकी अभिलाषा की जाती है।” यह बात सुनकर सब मूर्तिपूजक मुसलमानोंके मित्र बन गये फिर जब मुहम्मद साहबने देखा कि, मुसलमानों तथा मूर्तिपूजकोंमें कुछ विभिन्नता नहीं रही तब खेद करने और सोचने लगे।
दूसरा कथन—तब आपने यह आयत सुनाई जो सुरे हजमें है :—
وَمَا ارْسَلْنَاكَ مِنْ قَبْلِكَ مِنْ رَسُولٍ وَلَا نَبِيٍّ إِلَّا أَوْفَاةً أَوْ أَمَنِيَّةً أَلَيْسَ الشَّيْطَانُ فِي الْأَمْنِيَّةِ فَهُوَ شَمُّ اللَّهِ مَا لَيْسَ الشَّيْطَانُ شَمًّا مَكْرَمُ اللَّهُ آيَاتِهِ
अर्थात् ऐ ! मुहम्मद तुझसे आगे जो रसूल तथा अम्बिया संसारमें आये उनकी यह दशा हुई कि, जब उन्होंने कुछ पढ़ना चाहा तो शैतानने उनके पढ़नेमें कुछ अपनी बात मिलादी अतः खुदा शैतानकी मिलाई हुई बातोंको काटता है अपनी बातको दृढ़ कर देता है।
तात्पर्य—यह कि, मैंने जो बुतोंकी प्रशंसामें वह बात कही मूर्तियोंकी