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कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)

by कबीर साहेब

Source: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (origin)

Devanagarihipublished1,367 pages

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भली प्रकार देखा। उसका हाल पूछा। हजरत उमरने मुहम्मद साहबसे निवेदन किया कि, यदि आप आज्ञा दें तो मैं इस बालकको मार डालूँ। आपने फरमाया कि, यदि यह लड़का मसोहुद्दज्जाल है तो इसका मारनेवाला मसीह है। बिना मरियमके पुत्र ईसाके इसका मारनेवाला और कोई नहीं। जबतक मुहम्मद जीवित रहेगा तबतक उससे डरा करते थे कि, कदाचित् यही मसोहुद्दज्जाल हो एवं बगावत कर बैठे। आपको जम्मभर उसका भय रहा मनकी धड़क कभी भी न गयी।

सफरुसआदतमें लिखा है कि, एक दिन एक यहूदी स्त्रीने आपका (मुहम्मद साहबका) निमन्त्रण किया और कबाबमें विषमिलाकर लाई, जब वह कबाब आपके सामने रखा तो आपने उसमेंसे आपके सभीप बैठे हुए एक अमीरको कुछ दिया। उसने खाया, उसने जान लिया कि, कबाबमें विष है। उसने पुकारकर कहा कि, हजरत आप इस कबाबको न खाइये इसमें विष है। यह बात सुनकर मुहम्मद साहबने अपना हाथ भोजनसे खींच लिया। वह अमीर जिसने कबाब खालिया उसी समय मर गया, परन्तु मुहम्मद साहबने जो तीन ग्रास खाये थे उसका प्रभाव हजरतके शरीरपर थोड़ाही हुआ, जिससे प्राण बच गये। आपने उस स्त्रीको बुलाकर पूछा कि, तूने ऐसा कार्य क्यों किया। उसने कहा कि, मैंने आपकी परीक्षाके लिये यह कार्य किया था कि, आप सच्चे पैगम्बर हैं या नहीं। अब मुझे जान पड़ा कि, आप सच्चे नबी हैं। इसमें कोई सन्देह नहीं। मुहम्मद साहबने उस स्त्रीका वध कराया। वह तीन ग्रास जो आपने खाये थे उसका उद्देग उस समयसे प्रतिवर्ष हुआ करता था जिस समयसे आपने उस कबाबको खाया था। उस समय आपको बड़ा कष्ट हुआ करता था, जब वह कबाब खानेका समय आता था तब आप बीमार हो जाया करते थे। तीन वर्षके पीछे उसी विषसे आपकी मृत्यु होगई।

हजरत अपने भीतरी प्रकाशसे कुछ नहीं जान सकते थे। कभी कोई कोई बात जान भी लेते थे। जैसे बिजलीका चमक पड़ना, अधिक तो जिबराईल द्वारा कर्माकर्मसे बिज होकर उसीके अनुसार काय्य किया करते थे।

बैजावी तथा मदारक इत्यादिमें लिखा है कि, जिबराईल हजरतके निकट खुदाका हुकुम लेकर आया करते थे उस समय, वही (खुदाके हुकम) की रक्षाके लिये सत्तर सहस्र फिरिश्ते जिबराईलके साथ आया करते थे। उन्हें डर था कि, कहीं शैतान अपनी बात उसमें न मिला दे अथवा स्वयम् जिबराईल उस वहीमें कुछ अधिक और न्यून न करदे या बदल न दे। तात्पर्य यह कि, स्वच्छ तथा

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