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कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)

by कबीर साहेब

Source: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (origin)

Devanagarihipublished1,367 pages

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योहन्नाको जान पड़ा कि यह वही मसीह है। योहन्ना उजाड़में रहा करता था। उसका भोजन मधु और टिंडी था। वह ऊँटोंके रोंएकी पोशाक पहनता था, खालकी कमरबन्द कमरमें बाँधता था।

१०-हजरत ईसा-फिर इस पश्चिम देशमें हजरत ईसा सबसे श्रेष्ठ पैगम्बर उत्पन्न हुए। आपके विषयमें योहन्नाने कहा है कि, मैं ईसूके जूतेका तस्मा खोलने योग्य भी नहीं, सब पैगम्बरोंसे इतना मसीह श्रेष्ठ हैं।

मरकतका (१) बाब (७) आयत देखो। उन हजरतको भी कभी कभी कुछ प्रकाश होकर अन्तर्धान हो जाता था, सुतरां मतीके (२१) बाबके (१८) आयतसे (२०) आयततक और मरकसके (११) बाबके (१२) से (१४) आयत तक लिखा है कि, प्रातःकाल जब वह बैठ-‘अँना से बाहर आया तब मसीहको भक लगी उसने दूसरे इञ्जीरका एक वृक्ष देखा जो पत्तोंसे लदा था। उसके नीचे मसीह दौड़कर गया कि, कदाचित् उसमें कुछ फंस पावें, परन्तु वहाँ पत्तोंके सिवा और कुछ नहीं पाया। क्योंकि, वह इञ्जीरके फलनेका समय नहीं था, निराश होकर उसने इञ्जीरके वृक्षको शाप दिया कि तेरा फल महाप्रलय तक कोई न खावेगा उसके शापसे वह वृक्ष वहीं सूख गया।

समीक्षा—इससे तीन बातें प्रमाणित हुईं, पहले तो उन हजरत को फला और बिन फला वृक्ष मालूम नहीं था। दूसरे आपको इञ्जीरके फलनेका समय मालूम नहीं था। तीसरे उस वृक्षको व्यर्थही शाप दिया। क्योंकि उसका कुछ भी दोष नहीं था। हजरत मसीहमें वह प्रकाश था कि, जिससे आप अपने आवा-गमनको जानते थे सुतरां योहन्नाकी इञ्जीलका (९) बाब (५६-५८) आयत देखो आप आज्ञा करते हैं कि “तुम्हारा पिता इब्राहीम उत्सुक था कि, मेरा दिन देखे सुतरां उसने देखा और प्रसन्न हुआ” तब यहूदियोंने कहा कि, तेरी उम्र तो पचास बरस की भी नहीं? क्या तूने इबराहीमको देखा है। तब ईसाने कहा कि, मैं तुमसे सत्य सत्य कहता हूँ कि, इबराहीमके होनेके पहले मैं हूँ।

११ मुहम्मद मुस्तफा—जो अन्तिम पैगम्बर कहलाते हैं। मशकातके बाब किस्से अबिन सैयादके दूसरे फसिलमें आपका हाल इस प्रकार लिखा है, कि मुहम्मदसाहबने सुना कि, मदीनामें किसी यहूदिनके एक लड़का उत्पन्न हुआ है। उसकी एक आँख नहीं है, वह मादरजाद काना है। यह बात सुनकर आपको यह भय हुआ कि, कदाच यह लड़का मसीहहुज्जाल होगा। तात्पर्य यह कि, हजरत उमर सहित मुहम्मद साहब इस लड़केका वृत्तान्त जानने गये। उसको

वर।

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