BharatKosha
कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)

by कबीर साहेब

Source: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (origin)

Devanagarihipublished1,367 pages

Page 768 of 1367

Read in context
Page 768

पिंडसे मनुष्य होनेके चिन्ह—जो कोई पिण्डज खानिसे मनुष्य तन पाता है उसके चिन्ह ये हैं, वह वैरागी वासनाओंसे पृथक् होता है। वेदके अनुसार दान पुण्य करता है। योग समाधि लगाता है अपने गुरुसे अत्यन्त प्रेम तथा आधीनता करता है। उसके चरणोंसे लगा रहता है। वेद पुराण पढ़ता है बहुत धर्मचर्चा करता है। समाजमें उसकी बातें बुद्धि सहित होती हैं। राजभोग तथा स्त्रीसे प्रसन्न रहता है। बड़ा वीर तथा सामर्थी होता है। उसका स्वरूप और आकार कान्तिमय होता है। उसके हाथमें सदैव तलवार रहती है। जहां कहीं मूर्ति देखता है नमस्कार करता है।

यहांतक मैंने चारिखानिका विवरण किया फिर कबीर साहब कहते हैं कि, जो मनुष्य देह पाकर अल्पकालमें मर जाता है अपनी पूरी आयु पर्यन्त नहीं पहुँचता उसकी दशा दूसरी देहमें ऐसी होती है कि, वह मनुष्यकी देह छोड़कर पुनः मनुष्यकी देह पाता है। वह पुरुष बड़ा बीर तथा प्रतिष्ठित होता है। जैसे शेरके सामनेसे भेड़ोंकी भीड़ भाग जाती है उसी प्रकार वैरियोंकी सैन्य उसके सामनेसे भागती और तितर बितर होती है, वह विषयवासना तथा शारीरिक कामनाओं को पसन्द नहीं करता। उसके समीप दुर्बुद्धिता तथा मूर्खता नहीं जाती। उसको सत्य शब्दका विश्वास होता है। वह किसीकी निन्दा नहीं करता। नम्रता तथा बिनीततासे गुरुकी सेवा करता रहता है।

अन्य योनियोंमें पूर्वकी मनुष्य योनिके चिन्ह—इसी प्रकार चारखानि और चौरासी लाख योनिके जीव बनते हैं। जैसे चारों खानिके जीव मनुष्यका शरीर पाते हैं उसी प्रकार स्वकर्मानुसार मनुष्यका शरीर छोड़कर जब चौरासी योनीमें जाते हैं तब उनके पूर्वजन्मके चिन्ह उनके साथ होते हैं। उसका वृत्तान्त बहुत बड़ा है। चारों खानिके जीव सब बराबर हैं केवल तत्त्वोंके भेदसे बुद्धि स्वरूप और स्वभावमें भिन्नता होरही है, इसी प्रकार चारों खानि बनाकर चारों खानिमें स्वयम् निरञ्जन समा रहा है। कम्मोंके जालमें सब जीवोंको फँसा लिया है। उन सुकम्मों तथा दुष्कम्मोंके सब चिन्ह सब जीवोंके शरीरपर स्वयम् निरञ्जनने बनाये हैं। जिसने जैसा कार्य किया है उसके शरीरमें वैसेही चिन्ह प्रगट होते हैं। चारों खानिके सर्व जीव समान हैं। चारों खानिमें फिरते फिरते जब मनुष्यके शरीरमें आते हैं तब उनके कम्मोंके चिन्ह भली भांति प्रगट और स्पष्ट हो जाते हैं। इस मनुष्यहीके शरीरमें उनका पूरा हिसाब किताब होता है। यह आत्मा जिस शरीरमें होती है तब वहां वैसेही कार्योंको स्वीकार करती है। वही कार्यों करने लगती है गिरह बाज कबूतरके बच्चे आपही गिरहबाज होते हैं। लोटन कबूतरके