BharatKosha
कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)

by कबीर साहेब

Source: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (origin)

Devanagarihipublished1,367 pages

Page 778 of 1367

Read in context
Page 778

सच्चे झूठेका न्याय

१६-वायजकी किताब (२) बाब (१७) से २१ आयत तक यह लिखा हुआ है कि खुदा सच्चों तथा धूर्तोंका न्याय करेगा। क्योंकि, प्रत्येक अभिप्राय तथा प्रत्येक कार्यके लिये एक समय है। मैंने अपने मनमें कहा बनीआदमकी अवस्थाकी बात खुदा उनपर प्रगट करदे वे आपको पशुके सदृश जानने लगे, जो मनुष्य पर बीतता है वही पशुपर भी बीतता है, दोनों पर समान घटना संघटित होती है। जिस प्रकार यह मरता है वैसेही वह भी मरता है सबमें एकही स्वाँस है। मनुष्यमें पशुसे अधिकता नहीं है, क्योंकि, सब अनित्य हैं, सबके सब एकही स्थान पर जाते हैं सबके सब मिट्टीसे हैं, सबके सब मिट्टीमें मिलजाते हैं। मनुष्योंकी आत्माका ऊपर चढ़ना तथा पशुओंकी आत्माओंका नीचे उतरना कौन जानता है।

इसका तात्पर्य-खुदा सच्चोंका सुख तथा धूर्तोंका नियत समय पर दण्ड देगा। मनुष्यको जानना चाहिये कि, वे पशुके समान हैं। दोनोंमें एकही आत्मा और स्वाँस है। मनुष्यको पशुपर बड़ाई नहीं है। सब मरकर एकही जगह जाते हैं। इस कारण मिट्टी ही न समझना चाहिये। क्योंकि, मिट्टी ही केवल मिट्टीमें जाती है। आत्मा तथा स्वाँसादिक मिट्टीमें नहीं जाते। यहां मिट्टीसे तात्पर्य चौरासी लाख योनिसे है। क्योंकि, सर्वयोनि तथा सर्व शरीर मिट्टीसे बने हैं मिट्टी हैं, यहां मिट्टी नाम सर्व शरीरोंका है। अतः जीवके लिये एक शरीरसे दूसरेमें जाना आवश्यक है सब जीवोंके लिये यही नियुक्त गृह है कि, एक घर छोड़कर दूसरेमें जाया करे। सुकर्मों मनुष्य है, दुष्कर्मों पशु हैं। अच्छोंकी आत्मा स्वर्ग तथा बुरोंकी नरक में जाया करती है।

१७-दाऊदका पुनर्जन्म-पहले सलातनिके दूसरे बाब की पहली और दूसरे आयतमें लिखा है कि, दाऊद बादशाहके जब मृत्युके दिन निकट आये तब उसने अपने पुत्र सुलेमानको शिक्षा देकर कहा कि, मैं समस्त संसारका पथ जानता हूँ इस कारण तू दृढ़ हो अपने को मर्द दिखला।

फिर देखो इज्जीलमें आमालके दूसरे बाबकी २४ आयतमें लिखा है कि, दाऊद आकाशपर न गया और मौलवी अमादुद्दीन तालीम मुहम्मदी लिखितके (१३९) पृष्ठमें लिखा है कि, दाऊद पैगम्बरकी कब्रको अप्रतिष्ठापूर्वक खुदवा डाला।

हिरोदेश बादशाहने सुना था कि, पैगम्बरीकी लाश सड़ती नहीं। इसी परीक्षाके निमित्त उसने दाऊदकी लाश को ठीक नहीं पाया। उसने उसे सड़ती