कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)
Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)
by कबीर साहेब
Source: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (origin)
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Read in contextअधीन है। पाँच तत्व और तीन गुणके मेलसे यह शरीर प्रस्तुत होजाता है। विरुद्धता से मिट जाता है, मृत्युके पीछे अपवित्र आत्मा कई बार अपने शरीरके समीप आती है, उसमें बसनेकी इच्छा करती है, पर इस शरीरमें वासका कोई उपाय न देखकर निराश हो जाती है, पलटकर सात आत्मायें जो उससे भी बुरी होती हैं अपने साथ लाती है वे भीतर जाकर रहती हैं। तब मनुष्यकी पिछली अवस्था अगली अवस्थासे बुरी हो जाती है। वह सात आत्मायें जो इससे बुरी हैं वे ये हैं १—वायु। २—अग्नि। ३—जल। ४—पृथ्वी। ५—गुण। ६—सत्तोगुण। ७—तमोगुण। यह सात आत्मायें अपवित्र आत्माओं से भी बुरी हैं। क्योंकि, सातों आत्मायें वासनाकी कामनासे सिरसे पाँवतक भरी हैं। ये वासनाओंसे ऐसी भरी होती हैं, कि कभी कम नहीं होतीं। दिन प्रति दिन भरती ही रहती हैं। इन्हीं सातोंकी संगति और संयोगसे इस आत्माकी बुरी दशा है। ये ही सातों इस जीवको घेर घारकर आवागमनमें डालती हैं। इन्हीं सात निकृष्ट आत्माओंके सम्बन्धने सारे जीवोंको आवागमनके बन्धनमें डाल रखा है। जैसे कि, चोरके साथ साधु भी फँस जाता है इन्हीं सातके सम्बन्धसे आत्माकी निकृष्ट अवस्था हो रही है। इनकी कभी मुक्ति नहीं होती। इन्हीं सातों द्वारा समस्त रचनाएँ खड़ी हैं। जब तक इनका सङ्ग है तबतक जीवका यही ढङ्ग रहेगा। उनका उससे इसका कदापि छूटकारा नहीं हो सकता।
यह आत्मा अपने पूर्वकर्मोंके अनुसार इन्हीं सातोंको साथ लाती है। इन्हींके साथ मातृगर्भमें स्थिर होती है। वीर्यके साथ यह जीव अपनी प्रारब्ध सहित स्थिर होकर फिर गर्भका नियत समय सम्पूर्ण कर शरीरके साथ बहिर्गत होता है। तब जीवकी पिछली अवस्थासे अगली अवस्था बुरी होती है। क्योंकि, आत्मा जो पहिले कुत्सित तथा अपवित्र थी इस कारण उसकी पिछली अवस्था अगली अवस्थासे बुरी होती है। पहले वह मनुष्यके शरीरमें थी। मनुष्यका शरीर पाकर उसने जो कुकर्म किया तो अवश्य ही उसकी पिछली अवस्था अगली अवस्थासे बुरी होगी मानुषिक शरीरसे पृथक् गई और पशु आदिके शरीरमें उसका गमन हुआ। यह अपवित्र आत्मायें पशु तथा जड़ पदार्थ अथवा नरकमें जाती हैं। सहस्रों बार उनके आवागमनका सिलसिला चला जाता है। जिसने मनुष्यदेह पाकर अपनी मुक्तिका उपाय न किया वह बड़ा अभाग है।
१९—मती की इञ्जीलका २५ बाब १४ से ३० आयत पर्यन्त लिखा है और वहाँ कयामतका वृत्तान्त और तोड़ेका उदाहरण दिया है उसे यहाँ लिखते हैं—एक मालिकने यात्रा करनेके समय अपने एक भृत्यको पाँच तोड़े दिये, दूसरे को दो तोड़े तथा तीसरेको एक तोड़ा देकर चला गया। कुछ कालके पीछे उन नौक-