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कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)

by कबीर साहेब

Source: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (origin)

Devanagarihipublished1,367 pages

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आदमका दश दण्ड—काशितने आदमपर दश दण्ड किये थे, वे ये हैं कि, १ अमृत फल न खाओगे। २ अब बिहिस्त वस्त्र न मिलेगा। ३ स्त्रीके पास नङ्गे जाओगे। ४ बिहिस्तके बाहर जाओ। ५ काम कामना प्रबल होगी। ६ तुझपर शैतान अधिकृत होगा। ७ शैतानके भयसे तू भयभीत रहेगा। ८ अब तू पापिष्ठी हो गया। ९ तुमको बहुत दुःख होगा। १० ललचाया करेगा।

हौवाको पंद्रह दण्ड—आदमको शाप देनेके बाद हौवाको शाप दिया कि, १ रजस्वला होओ। २ नौ मासमें बच्चा जनो। ३ दुःख दर्दसे बालक जनो। ४ अपने पतिके अधीन रहो। ५ अपने पतिकी आज्ञाकारिणी रहो। ६ तुझे थोड़ा भाग मिलेगा। ७ स्त्रियोंके नामसे तलाक (त्यागपत्र) न होगा। ८ अपने पतिकी सेवा किया करो। ९ स्त्रीकी साक्षी न मानी जायगी। १० स्त्रीको सलाम न की जायगी। ११ स्त्रियोंका कुछ विश्वास न होगा। १२ पुरुषके बुद्धिके दशवें भागकी बुद्धि होगी। १३ जहाद न कर सकोगी। १४ जूमाकी नमाज न पढ़ सकोगी। १५ नबी न हो सकोगी ये पन्द्रह दण्ड हौवाको दिये गये थे।

निष्कर्ष—इससे यह सिद्ध हुआ कि, सारे पशु मनुष्योंके समान हैं। दूसरी बात नहीं है।

विरोध—जबसे यह समस्त घटना हुई है तबसे उनमें वैर हो गया। सर्पको मनुष्य मारने लगे सर्प मनुष्योंको काटने लगे मयूर जहाँ सर्पको पाता है पकड़ कर खा जाता है यही इनके विरोधका कारण है।

हीरा पुत्र होनेका आशीर्वाद—पञ्जाब गुरदासपुरके कानूवाल थाना नामक गाँवमें एक सरदारकी स्त्री रामकुँवरि अपने द्वारपर बैठी, दासीसे पांव धुलवा रही थी। इसी समय सहसा एक सांप दौड़ता आया उसकी कोठरीके भीतर घुस गया। मनुष्यके स्वरमें बोला कि, माई ! मुझको योगीके हाथ से बचा। मैं तेरी शरण आया हूँ। स्त्रीने कहा कि, ऐ भाई ! सांप कब किसीके साथ भलाई करते हैं ? साँपने कहा कि, मैं तेरे साथ भलाई करूँगा जो कुछ तू मागेगी वही दूंगा। उसने कहा कि, मेरे पुत्र नहीं है। उसने कहा कि, तेरे पुत्र होगा उसका नाम हीरा रखना तेरी सन्तानपर सर्पके विषका कभी असर न होगा। वे जिसपर हाथ रखेंगे उसपर भी सर्पका विष असर न करेगा।

इतनेमें योगी साँपके पीछे दौड़ा आया, स्त्रीने कोठरीका द्वार बंदकर लिया। साँपको उसके हाथसे बचाया। यद्यपि उस योगीने साँप पकड़नेका बहुत उद्योग किया पर स्त्रीने पकड़ने नहीं दिया उसे पांच रुपया देकर विदा कर दिया। साँपने स्त्रीसे जो कुछ प्रण किया था वह पूरा किया। उसी स्त्रीकी सन्तानोंमेंसे एक मनुष्यने मुझसे यह कहानी कही थी।