भारतकोश
कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)

कबीर साहेब द्वारा

स्रोत: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)

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पृष्ठ 895

पुकारते दोहाई देते कि “दोहाई बाबा धारीरामकी” जिससे धारीराम का नाम सुनतेही सांप भाग जाता। बैर छोड़ देते। सांप काटनेके समय मैं सदैव सुना करता था कि, लोग बाबा धारीरामकी दोहाई दिया करते थे और सांपके विषसे बच जाते थे। उसके भाईयोंने उसके मरनेपर बहुत शोक किया। उसकी श्राद्धादि सब क्रियाएं मनुष्योंकी तरह ही की।

सांप और बालक—पञ्जाब देश जिला लुधियाना जिगरावें गाँवके विषयमें सुना गया था कि, एक छोटा लड़का रोटी खाते २ एक सर्पको पकड़ उसका शिर रोटीके साथ लगाकर कहता कि, ओ तू रोटी खा। सब लोग खड़े देख रहे थे उसके माता पिता खड़े पुकारते कि, तू सांपको छोड़ दे पर वह लड़का न छोड़ता था। सांपका शिर पकड़कर रोटीको लगा लगाकर कहता कि, तू रोटी खाले, लोग देख कर चकित हो रहे थे। अन्तमें लड़केने सांपका शिर छोड़ा, सांप भाग गया लड़के को कुछ भी कष्ट न पहुँचाया।

मानुषी भाषापर तौरीत—तौरीतमें उत्पत्तिकी पुस्तकका (३) बाब देखो। सर्प होवासे मनुष्यके समान बातें करता था, इससे प्रमाणित होता है कि, उस समय पशु मनुष्योंके समान वार्तालाप किया करते थे। मनुष्योंके समान ही एक दूसरेका कहा भी मान लेते थे। यह बात आश्चर्यकी नहीं है, यदि यह बात आश्चर्यकी होती तो आदम धोखा न खाता।

हदीस मुहम्मदीमें—इस प्रकार लिखा है कि, पहले शैतान कूदकर बिहिश्तकी दीवार पर बैठ गया पर वैकुण्ठके भीतर न जाता। सोचने लगा कि, अब मैं बिहिश्तके भीतर कैसे बैठूँ। उस समय उसने मयूरको देखा उससे प्रार्थना की कि, मुझको वैकुण्ठकी सैर करवा दो। मयूरने कहा कि, मुझमें सामर्थ्य नहीं पर मेरा मित्र एक सांप है तेरे पास उसको बुलाता हूँ, वह तेरा काम अवश्य करेगा। मयूर अपने मित्रके समीप गया। उससे सलाह की सर्पको लेकर शैतानके पास गया। वह सर्प शैतानके समीप गया वह शैतान अपना अतिलघुस्वरूप करके उस सर्पके मुँहमें बैठ गया। सर्प बिहिश्तके भीतर गया। उसके साथ शैतान भी बिहिश्त के भीतर गया सांपके मुँहसे बाहर निकल आया हौवाको बहकाया। आदम तथा हौवा दोनों कलुषित हुये।

खुदाका शाप—खुदाने उन पाँचोंको शाप दिया। शैतानको तुच्छ ठहराया। उस समय सर्पके ऊँटके समान चार पाँव थे उसके याकृतके होठ तथा कस्तुरी की जीभ थी। वह बड़ा सुन्दर था आगे परमेश्वरने उसके समस्त गुण पृथक् कर दिये। वह विषसे भर गया पेटके बल चलने लगा। मयूरके भी बहुत प्रकाशित छः पंख छीन लिये गये। उसका सौन्दर्य जाता रहा।