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कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)

by कबीर साहेब

Source: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (origin)

Devanagarihipublished1,367 pages

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नन्दियोंके भजनके अभिमानका नष्ट करनेके लियेही उत्पन्न की गई है । कबीर साहिबने नींदको यमकी दासी बताया है कि—

साखी— निन्द कहे मैं यमकी दासी ।

एक हाथ मुँगरा एक हाथ फाँसी ॥

भजनानन्दी बछड़ा—मैंने सुना था कि, पञ्जाब जिला रोहतक बाँगर देशमें संवत् १९३६ में गायका बच्चा पैदा हुआ वह । उगाल भी करता था । राम राम भी कहता था, उसके राम रामके कहनेको सुनकर लोग बहुत भेंट चढ़ाते थे ।

समय—जब एक पहर रात रह जाती है, तब सब जीवधारी परमात्माके भजनमें लग जाते हैं । कोई आधी रात कोई कोई सारी रात भजनमें लगे रहते हैं, परमेश्वरके अनन्त नाम हैं, उनमेंसे कोई न कोई नाम जपते रहते हैं ।

सोप—कभी २ देखा गया है कि, सोप सूर्य निकलने पर छतरीको फैलाकर हिलाता है ।

शिवका जपी—एक पक्षी गौरैयाके बराबर होता है वह दिनरात उच्च शब्दसे शिव २ कहा करता है ।

चिनगीबटेर—एक दूसरा पक्षी बटेरसेभी छोटा होता है वह भी शिव २ कहता अनुमान किया गया है इसको चिन्गीबटेर कहते हैं, यह उत्तर पहाड़में हुआ करती है । एक समय पहाड़से उसको कोई फिरोजपुरमें लाया पिंजड़ेमें रक्खा, उसकी बोलीपर बहुत लोग मोहित हो गये, उसको सब लोग प्यार करने लगे, जिसके पास वह पक्षी था उसको बड़े विनयके साथ अपने घरको ले जाया करते पक्षीकी मीठी २ बोली सुना करते । यह भजन करनेवाला पक्षी सबको प्यारा लगता था । मैं सर्वदा इस पक्षीकी बोली सुना करता था । दिनमें तो उसकी बोली सुनाई नहीं देती । शर्दीके दिनोंमें भी यह विशेष नहीं बोलती, शेष दिनोंमें जोर २ से शिवजी शिवजी पुकारा करती थी । यह पक्षी मेरे निवास स्थानसे पचास कदम की दूरी पर रहती है उसका नाम जपनेका सुनकर मुझे बड़ा आनन्द प्राप्त होता था । इस पक्षीको परमात्माने जैसा अनुराग भजनका प्रदान किया है वैसे बहुत कम भजनीक मिलेंगे ।

ऐसी एक दूसरी पक्षीको सुना कि, वह शिव शब्दको बड़े लम्बे और ऊँचे शब्दसे कहा करती थी ।

बोलियोंके अर्थ—एक पक्षी बोलती है—या बटूह ! या बटूह ! एक बोलती है, पिता पिता । एक पक्षी कहती है अजीज ! अजीज ! बाढ़ बुला