कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)
Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)
by कबीर साहेब
Source: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (origin)
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Read in contextस्वसंवेदमें—सृष्टिके स्थितिकी सात शाखायें लिखी हैं— १ अनाज, २ घास, ३ पानी, ४ मिट्टी, ५ पत्तियाँ, ६ फल, ७ फूल इन्हीं सातों प्रकारके भोजनोंसे सर्व जीवधारियोंका जीवन है, अनाजसे मनुष्य, घाससे पशु, पानीसे जलचर पलते हैं कितने ऐसे भी जीवधारी हैं जो मिट्टी खाकर ही रहते हैं, कितनेही कीड़े पत्तियोंसेही जीवन व्यतीत करते हैं. बन्दर आदि पशु फल खाकर रहते हैं कितने अपने जीवनकी रक्षा फूलहीसे करते हैं।
मांसकी पेसाबसे तुलना—दो प्रकारकी सृष्टि है। एक जलसे दूसरी वीर्यसे होती है जलकी वह सृष्टि है जो जलसे उत्पन्न होती है। वीर्यकी सृष्टि वीर्य और लोहसे उत्पन्न होती है। जलसे उत्पन्न होनेवाली सृष्टिको लोग अशुद्ध नहीं समझते। वीर्यसे उत्पन्न होनेवालीको अशुद्ध जानते हैं अनाज फल आदि सब जलकी सृष्टि है। पशु पक्षरू आदिकी उत्पत्ति वीर्यसे है। प्रायः मुसलमानोंको देखा जाता है कि, पिशाब करनेके समय एक मिट्टीका डला हाथमें ले जाते हैं, जिससे पिशाब करके उपस्थ इन्द्रियको पोंछते रहते हैं, जिसमें पिशाबकी बूँद कपड़ेमें लगकर उसे अशुद्ध न कर दे आश्चर्यकी बात है कि, जिस पिशाबकी एक बूँदसे भजनमें हानि होनेके भयसे डला लेकर घण्टों खड़े रहते हैं उसी पिशाबसे उत्पन्न हुआ महा निकृष्ट पदार्थ मांससे आध सेर पेटमें रखकर निमाजके लिये खड़े होते हैं ऐसी बुद्धि और समझको धिक्कार है।
४० दिनके बाद काफिर—हदीसमें आया है कि, जो कोई चालीस दिनतक बराबर मांस खाता रहे दिन भी दिन न छूटने दें तो वह अवश्यही काफिर हो जायगा। मैं कहता हूँ कि, जो कोई एक बार मांस खानेकी इच्छा करेगा अथवा खायगा तो वह काफिरोंमें भी काफिर हो जायगा। आदमने एकही बार खाया था जिसके कारण बिहिश्तसे निकाले गये थे।
जीवके देखते जीवहत्याका निषेध—मुसलमान कहते हैं कि, रसूलिल्लाहने फरमाया है कि, तुम किसी जानदारको दूसरे जीवधारीके सामने जबह मत करो “ऐसा करनेसे उसके दिलमें भय उत्पन्न होगा कि, आज यह उसको कत्तल करता है कल मेरे साथ भी ऐसा व्यवहार करेगा” अफसोस है मुसलमानोंकी बुद्धि और समझ पर कि, पशुओंके डरनेसे तो डरना खुदा जो व्यापक सर्व द्रष्टा (हाजिर-नाजिर) खुदा है उससे तनिक भी भय न करना।
न मिलनेका कारण—इसहाकका बेटा ईशू बड़ा शिकारी था, इसी कारण अपना ज्येष्ठांश खो बैठे पितासे उसको बरकत नहीं मिली जो याकूब चरवाहा था उसे मिली। शिकारी कठोर हृदय—मांसाहारी कभी कल्याण न पायेंगे।