भारतकोश
कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)

कबीर साहेब द्वारा

स्रोत: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)

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युक्ति प्रमाण ।

भारत वर्षके इतिहाससे प्रगट होता है कि देवता और दैत्य सर्वदासे लड़ते आये हैं देवता सर्वदा जय पाते थे, जब संयोगन देवतोंकी हार होती थी तो उनको अन्तरिक्षसे सहायता मिलती थी, भलोंका सहायक परमेश्वर है। वह बुरोंको कभी भी सहायता नहीं देता ।

लोहूके निषेधका तात्पर्य—हजरत नूह मूसा आदिकको खुदाने हुकम दिया था कि, तुमको अनाज, फल, मांस आदिक खानेको दिया मांस खाना और लोहू फेंक देना क्योंकि, लोहूका बदला लिया जावेगा। लोहू पशुका जीवन है। न्यायका स्थान है, जब कि, किसी जीवधारीको मारा तो उसका लोहू खाओ चाहे फेंक दो, उसकी जान तो गई। क्या प्राणसे लोहू अधिक है कि, फेंक देनेसे उसका बदला न लिया जायगा कौसी अन्यायकी बात है, प्राणके साथही तो उसका सब शरीर है, हाड, चाम, मांस, लोहू, रग, आंत इत्यादि, जो चाहो सो खाओ अथवा फेंक दो। हत्या तो उसके मारतेही गरदनपर सवार हो गई, ऐसे कपटी और छली खुदाके छल कपटको हंस कबीरके बिना दूसरा कोई नहीं जान सकता, इस खुदाके भेष धारण करनेवाले अखुदाने सबकी बुद्धिपर परदा डाल दिया है ख्यमु बात तो यह है कि, रहीम हत्यारा नहीं हो सकता ।

याकूबको गऊका शाप—दीन इसलामसे प्रगट है कि, एक दिन हजरत याकूबने एक गायके बछड़ेको मारकर खा लिया ये जिस समय बछड़ेको मार रहे थे वहाँही उसकी माँ खड़ी देख रही थी, गायने याकूबको शाप दिया, जिसका यह फल हुआ कि, याकूबका बेटा ईसुफ मार कूटकर कूवामें डाला गया उसके शोकसे याकूब रोते रोते अन्धा हो गया। विचारनेकी बात है कि, जब एक बछड़ेके मारनेसे याकूबकी यह दशा होगई तो जो लोग हजारों जीवोंकी हिंसा करते हैं उनकी दशा क्या होगी ?

शिकारीकी हिंसक पशुओंसे तुल्यता—जितने हिंसक और शिकारी पशु हैं सब अशुद्ध हैं। मूसा और मुहम्मदकी शरियतसे भी प्रगट होता है कि, मांसाहारी सब पशु नापाक हैं, यह बात प्रगट भी है कि, शेर भेड़िया, कुत्ता, बिल्ली, बाघ और शाहीन आदिक मांसाहारी शिकारी और हिंसक पशु अशुद्ध ठहरे, तो मांस खानेवाला, शिकार करनेवाला और हिंसा करनेवाला, कैसे शुद्ध हो सकता है ? जिसको कि, अपने भले बुरे कर्मका ईश्वरके सम्मुख हिसाब देना है ।

कब—जब मुहम्मद साहब जहाद और लड़ाईको जाया करते थे वहाँ अनाज नहीं मिलता था तो जानवरोंको जबह करके खानेकी आज्ञा दिया करते