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कबीर सागर (11 भाग संपूर्ण)

कबीर सागर (11 भाग संपूर्ण)

Kabir Sagar (11 Parts Complete)

by कबीर साहेब / खेमराज श्रीकृष्णदास

Source: खेमराज श्रीकृष्णदास प्रकाशन, बम्बई - कबीर सागर सम्पूर्ण ११ भाग · खेमराज श्रीकृष्णदास (origin)

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बोधसागर

(३१)

१५ पन्द्रहवाँ फिरिश्ता शहवत ( रजोगुण ) है जिसको ब्रह्मा कहते हैं ।

१६ सोलहवाँ तभीज ( सतोगुण ) है जो सत्य असत्य का विचार बतलाता है इसीको विष्णु कहते हैं ।

१७ सतरहवाँ फिरिश्ता गजब ( तमोगुण ) है जो दुःखदाई पदार्थोंसे रक्षा करता है इसीको शिव कहते हैं ।

इसी प्रकार पांच तत्व और सर्व प्रकृतियाँ आदि संसारके सर्व वस्तु फिरिश्तो हैं और जिसप्रकार शरीर का राजा जीव है उसी प्रकार सब जड़ चैतन्य का स्वामी साहिब है जिसके शरणमें जानेसे अटल सुख प्राप्त होता है ।

इति काफिरबोध

इति श्रीबोधसागरान्तर्गत काफिरबोध नामकदशमस्तरंगः

नातध्य

काफिर बोध पुस्तक के प्रथम मंजिलकी एकही प्रति मेरे पास है । बहुत प्रयत्न करने पर भी उसकी दूसरी प्रति न मिल सकी इस कारण जैसी प्रति थी उसीके अनुसार ही रक्खा है । इस ग्रन्थ में फारसी और अरबी शब्दों का बहुत प्रयोग किया है किन्तु यह ग्रन्थ लिखा हुआ अशुद्ध हिन्दी अक्षरोंमें मिला है और दूसरी प्रति न रहने तथा छपने की शीघ्रता के कारण से कितने शब्द शुद्धरूप जान पड़नेके कारण जो त्रुटियाँ रह गयी हैं उनको दूर करने के लिये प्रयत्न कर रहा हूँ प्रयत्न सफल होने पर दूसरी आवृत्ति में ठीक कर दिया जायगा ।

इति

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