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करूँ जगत से न्यार

करूँ जगत से न्यार

Karun Jagat Se Nyaar

by सतगुरु मधु परमहंस जी

Source: साहिब बंदगी आध्यात्मिक संस्थान · साहिब बंदगी (origin)

Devanagarihipublished264 pages

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जितनी गहराई से हमारे नामियों ने हमें पकड़ा है, उतना किसी भी पंथ की संगत ने अपने गुरु को न पकड़ा होगा। आप दृढ़ रहना, विरोध की चिंता नहीं करना। यह तो होगी ही । आप नाम में लगे रहना।

तू नाम सुमर जग लड़ने दे ...॥

वो टीम तगड़ी है। उन्हें भय है; उन्हें ठीक-ठीक मालूम है । इसलिए हमारी जान के सौदागर भी बहुत हैं । पर हम डर नहीं रहे । 'जब औखली में सिर दिया तो मूसलों से क्या डरना । । ' और 'नाचन निकली तो घूँघट कैसा ! ' अगर नाचने वाला पेशा है तो घूँघट खोलकर नाचना है। साहिब की भक्ति में आए हैं तो चुपके-चुपके नहीं आना है, डंके की चोट पर आना है । सब बात साफ़-साफ़ है । तो वो हर सीमा तक जायेंगे। प्लैनिंग कैसे करते हैं ? कहीं कमलसिंह की पत्नी को सिर दर्द हो गया । पहले वो शराबी - कबाबी था; मौज-मस्ती वाला था । नाम लेकर भक्त हो गया; ढाबा खोला; खुशहाल हुआ। सयाने-चेले आए, कहा कि भूत मानो, नाचो गायो। वो दाँव बड़ा खेलते हैं। यह घर के लोग भी चला सकते हैं ।

मुझे है काम सतगुरु से, दुनिया रूठे तो रूठन दे ।।

कहा कि तेरी माँ, जो मर गयी थी, वो आ गयी है । सास- नूह की खींचाखांची है। उसी के कारण है सिर दर्द । फिर कहा कि चारों भाई बैठोगे, तभी हत्या मानेगी। उन्हें मालूम है कि कमलसिंह नहीं आयेगा । तो भाई ने कहा कि चल । कमलसिंह ने कहा कि साहिब के पास चलो। उन्होंने कहा कि वो तो मुसलमान है । कमलसिंह ने कहा कि हिंदू तो हम हैं, जो हड्डियाँ नहीं चबा रहे, शराब नहीं पी रहे, किसी को सता नहीं रहे । फिर कहा कि वो तो चमार है। मेरे गुरुदेव ने कहा था कि अपनी जाति नहीं बताना, क्योंकि सन्यासी की कोई जाति नहीं होती है । तो उसके भाई ने कहा कि तू माँ का नहीं हुआ तो किसी का नहीं हो सकता है । तू माँ की खुशी के लिए हत्या मना। बकरा चढ़ाना है, 1-1 हज़ार रूपये डालने हैं। नहीं, यह प्लैन था। देवता कोई बकरा नहीं खाता । साहिब तो कह रहे

मांसाहारी मानवा प्रत्यक्ष राक्षस जान ।

उसकी संगत न करो, होय भक्ति में हानि ।।