भारतकोश
करूँ जगत से न्यार

करूँ जगत से न्यार

Karun Jagat Se Nyaar

सतगुरु मधु परमहंस जी द्वारा

स्रोत: साहिब बंदगी आध्यात्मिक संस्थान · साहिब बंदगी (उद्गम)

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बंदगी वाला प्रोग्राम न आए, क्योंकि इससे बाकी सभी के प्रवचन फीके पड़ रहे हैं, आपके प्रवचन के आगे उनका वजूद मिट रहा है। वो आनन्द जोशी साफ़-साफ़ कहा कि महात्मा कह रहे हैं कि इनका प्रोग्राम चलाओगे तो हम अपना प्रोग्राम बंद कर देंगे, क्योंकि जबसे इनका प्रोग्राम आ रहा है, हमारा प्रोग्राम फीका पड़ गया है, कोई नहीं देख रहा है। हमने तो किसी का प्रोग्राम बंद नहीं करवाया। बाकी कह रहे हैं कि इनका प्रोग्राम बंद करो। ये कैसे लोग हैं, विचार तो करो ! हमारा प्रोग्राम ही नहीं आने देना चाहते हैं। पर मैं इससे परेशान नहीं हूँ। मेरा तो पूरा प्रोग्राम लाइव चल रहा है । एक ने मुझसे कहा कि आपका लिट्रेचर पढ़ना चाहता हूँ । मैंने कहा कि तुम नहीं पढ़ पाओगे । उसने सोचा कि शायद बहुत बड़ा है; कहा—कितना है ? मैंने कहा कि मेरी संगत ही मेरा लिट्रेचर है; उन्हें पढ़ो। मेरा एक-एक नामी मेरी पुस्तक का एक-एक पन्ना है। पढ़ो मोहनलाल को कि वो पहले कैसा था और अब कैसा हो गया है; पढ़ो लहरसिंह को कि वो पहले कैसा था और अब कैसा हो गया है; पढ़ो जवान बच्चों को कि उनका चरित्र कैसा हो गया है! ....तो कइयों के व्यवसाय को मुझसे अंतर पड़ा । राँड़ी मोड़ पर पोलिट्री फार्म था। वो बड़ी निंदा करता था । मैंने अपने लोगों से कहा कि यह तो ठकुरा है, कोई सयाना भी नहीं है, फिर इसे क्या लेना है ? उन्होंने कहा कि आपने तो इसका बेड़ा ही गर्क कर दिया है । इसने दो कोठियाँ बनाईं अपने पोलिट्री फार्म से। पर अब इसका धंधा ही समाप्त हो गया है। कई शराबी- कबाबी इसके पास आते थे। शाम तक यह 2 हज़ार कमा लेता था । पर अब यह ग़रीब हो गया है। तो वो अपने अंदर की भंडास निकाल रहा था । इस तरह कुछ मुझतक नहीं पहुँच पाते हैं तो आपसे अपनी भंडास निकालते हैं, कभी कहते हैं कि यह मुसलमान है, कभी कहते हैं कि यह तो चमार है, कभी कहते हैं कि इसने तो धर्म बदल दिया । आप ध्यान देना, खामोशी से देखना तो लगेगा कि वो खुद भी निजी तौर पर अच्छा नहीं होगा । उसने मान लिया है कि ये न मुर्गी खा रहे हैं, न सूत्रे पर, न किसी तिथि -त्यौहार पर बुला रहे हैं ।