भारतकोश
करूँ जगत से न्यार

करूँ जगत से न्यार

Karun Jagat Se Nyaar

सतगुरु मधु परमहंस जी द्वारा

स्रोत: साहिब बंदगी आध्यात्मिक संस्थान · साहिब बंदगी (उद्गम)

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करनी में, आपकी रहनी में बहुत अंतर आ गया है । आप पूरे बदल चुके हैं, ज्ञानी महात्मा हो गये हैं । काशी के एक पंडित हैं। वे ब्राह्मणों को पढ़ाते हैं । काशी हिंदू धर्म की राजधानी है। वो बहुत बड़े विद्वान हैं । एक दिन मेरे पास आए। एक अनपढ़ नामी उन्हें लाया। पंडित जी ने मुझे प्रणाम किया, कहा- महाराज ! यह आपका एक शिष्य है, मैंने इसे देखा तो आपके पास आया । आपने इसे क्या बना दिया! यह तो महात्मा से भी ऊपर है। कहा कि यह झूठ नहीं बोलता है । हम तो ज्ञानी हैं, फिर भी कभी - कभी बोल देते हैं, पर यह नहीं बोलता है । इसका आचरण भी बहुत ऊँचा है। गाय-भैंस चराता है । इतना अक्लमंद है कि फालतू बात नहीं करता है । हक़ की कमाई खाता है, संतुष्ट है, शांत है। 2-3 बच्चे हैं इसके, पर संतुष्ट इतना कि परम ज्ञानी भी इतना संतुष्ट नहीं हो सकता है । हम ज्ञानी हैं, पर कई बार जीवों को मार देते हैं | यह है कि किसी भी जीव को नहीं मारता है। मैंने इसे देखा । मुझे विचार आया कि इसे किसने ऐसा बनाया ! वो इतना बड़ा ज्ञानी ऐसी बात कह रहा है । मैंने आपको पहले कहा कि कोई भी नेक इंसान हमारी निंदा नहीं कर सकता है । निहायत ही गंदे लोग ही मेरी निंदा कर रहे हैं । उनको नाम की ताक़त नज़र नहीं आ रही है । मेरे हर नामी से पूछना कि बदलाव आया कि नहीं । आपकी करनी चेंज हो गयी, हृदय प्रकाशित हो गया, किसी भी जीव को आप कष्ट नहीं दे रहे हैं। बुद्धि उत्तम हो गयी, कोई पापिष्ट कर्म नहीं कर रहे। तीसरा, आपको अच्छा सरंक्षक मिल गया है, फ़िकर नहीं है, जानते हैं कि साहिब सब करेगा, क्योंकि वो ही करता आ रहा है ।

तेरी कृपा से ही मेरा, सब काम हो रहा है ।

करते हो तुम ही साहिबा, मेरा नाम हो रहा है ॥

कई मौकों पर आपने यह चीज़ देखी है । अब आप भ्रमित नहीं हो रहे हैं। हालांकि आपको भ्रमित करने की कोशिश की जा रही है, आपको मजबूर किया जा रहा है कि आप ग्रह दशा मानें, आप भूत-प्रेत मानें, पर आप मजबूत हैं, दृढ़ हैं। कहना नहीं चाहिए, पर मुझे मुम्बई से आस्था वालों ने फोन किया, कहा कि कुछ बड़े-बड़े कथावाचक चाहते हैं कि साहिब-