भारतकोश
करूँ जगत से न्यार

करूँ जगत से न्यार

Karun Jagat Se Nyaar

सतगुरु मधु परमहंस जी द्वारा

स्रोत: साहिब बंदगी आध्यात्मिक संस्थान · साहिब बंदगी (उद्गम)

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ऐसी ऐसी जगहों पर हैं कि वहाँ की पब्लिक यदि चाहे भी तो 100 साल में भी इतना पैसा नहीं दे पायेगी, जितना वहाँ लगाया है । क्योंकि ग़रीब पब्लिक है। ... तो एक बात के लिए दुनिया हैरान है कि साहिब बंदगी में ग़रीब, बीमार ज्यादा हैं, फिर इन्होंने इतने कम समय में 132 आश्रम कैसे बना दिये ! इतनी बड़ी-बड़ी बिल्डिंगें हैं, पैसा कहाँ से आया, यह सोचकर वो परेशान हो जाते हैं । बस, जो परेशान हैं, वही तो विरोध कर रहे हैं । तो मेरे विचार से आपकी फ़िजूल खर्ची कम हो गयी, बीमारियाँ कम हो गयीं। हमने आपके सेहतमंद रहने के फार्मूले बताये, जिससे आपकी बीमारियाँ कम हुईं। आप फालतू घूमते-फिरते भी नहीं । आपकी आर्थिक दशा ठीक हुई। फिर आपका विरोध क्यों ? आप किसी को परेशान भी नहीं कर रहे, किसी के साथ मारपीट भी नहीं कर रहे । हर नामी महात्मा वाला जीवन जी रहा है। आप किसी से छल-कपट नहीं कर रहे। फिर क्या बात है ? मैंने एक उदाहरण दिया। लोग चाहते हैं कि आप सच पर न चलें, आप अच्छे काम न करें । फिर कैसे लोग हैं ये ! आज ईर्ष्या का युग है। किसी को इस बात से परेशानी नहीं है कि उसके पास यह चीज़ क्यों नहीं है; उसे परेशानी है तो इस बात की कि दूसरे के पास यह क्यों है । वो दूसरों के सुख से दुखी है | आप संतुष्ट हैं। इसलिए आपको लोग असंतुष्ट करने की कोशिश करना चाहेंगे। मैं कमलसिंह का उदाहरण देता हूँ। पहले वो बड़ा ही ख़तरनाक था; शिकारी टाइप था। मारकाट करना, कुछ भी खा जाना। बड़ा खूँखार था। सभी बुराइयाँ थी उसमें । उसने जमीनें ख़रीदीं, मकान बनाए, 3 दुकानें बना लीं, अच्छा बन गया। जो उसने होटल बनाई, उसमें पत्नी खाना बनाती है और खुद वो परोसता है, कहता है कि हलवाई नहीं रखना चाहता हूँ, क्योंकि खाते-पीते हैं, गंदे होते हैं। ऐसे राक्षस को अच्छा बनाया तो नमस्कार करना चाहिए, धन्यवाद देना चाहिए या निंदा करनी चाहिए ! यानी बुरे लोगों का समूह चाहता है कि आप भी बुराई से न निकलें। आप तो अब चाहकर भी पाप नहीं कर पा रहे हैं । आप नेक इंसान बन गये हैं। यदि आप अपने पूर्व जीवन की तरफ देखें तो पायेंगे कि आपकी