भारतकोश
करूँ जगत से न्यार

करूँ जगत से न्यार

Karun Jagat Se Nyaar

सतगुरु मधु परमहंस जी द्वारा

स्रोत: साहिब बंदगी आध्यात्मिक संस्थान · साहिब बंदगी (उद्गम)

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जुल्म की बात थी । उसने ग़लत रास्ता पकड़ा था क्या ! बात यह थी कि पाखण्डी, शास्त्री आदि ने महसूस किया कि यह साहिब बंदगी से जुड़ गया है और बाकी को भी वहाँ ले जायेगा, हमारे काम में रुकावट पड़ेगी, इसलिए उसका बहिष्कार किया था । आपका विरोध होना ही है, क्योंकि लोग चाहते हैं कि आप सही राह पर न आएँ। एक चीज़ दावे से बताता हूँ कि मुझसे नाम लेने के बाद आदमी की आर्थिक दशा भी सुधर जाती है। ग़रीबी के सारे कारण माँस, शराब आदि छुड़ा दी। अब लोगों से हड्डी चबाना छूट नहीं रहा है । आपको अब यह सब अच्छा नहीं लग रहा है । इसलिए रिश्तेदार छूट गये हैं । आप अब ऐसे लोगों के घर नहीं जाना चाहेंगे जो माँस खाते हैं। वो कहते हैं कि हमने आपको छोड़ दिया। पर उन्होंने क्या छोड़ना था, आपने ही उन्हें छोड़ दिया है। इसलिए परेशान होकर विरोध कर रहे हैं । आप देखें, शराब की 100-200 की बोतल के लिए दुकान में लाइन लगी हुई है, जबकि सेहतमंद दूध गली-गली गुज्जर दे रहा है, पर उसकी तरफ किसी का ध्यान नहीं है । तो हमारी निंदा शराबी - कबाबी ही कर रहे हैं । किसी भी शराबी से यह उम्मीद नहीं करना कि वो ठीक काम करेगा । आप परिश्रमी बन गये; आपने गंदे काम छोड़ दिये। वो चाहते हैं कि आप भी गंदे बनें। जब तक दुनिया में गंदे लोग रहेंगे, आपका विरोध होगा, इसलिए आपका विरोध कभी ख़त्म नहीं होने वाला है, क्योंकि दुनिया से बुरे लोग कभी ख़त्म नहीं होंगे। जब तक यह दुनिया रहेगी, आपकी तरह अच्छे लोग भी रहेंगे और आपकी निंदा का बीड़ा उठाने के लिए बुरे लोग भी रहेंगे। रामगढ़ में छोटा आश्रम है । वहाँ संगत बहुत आती है । वहाँ गाड़ी खड़ी करने की जगह भी नहीं मिलती है । एक ने कहा कि रोड़ पर खड़ी करें तो लोग गाली देते हैं। उसने कहा कि आपने सबको अमीर बना दिया है; सबके पास गाड़ी हो गयी है। मैं कहना चाहता हूँ कि नाम पाने के बाद ग़रीबी कम हो जाती है। सबसे बड़ी बात है कि आप संतुष्ट हैं । मैं सभी आश्रमों में जाता हूँ। सबमें पूरा-पूरा इंतजाम किया है। कुछ