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कथासरित्सागर : प्रथम खण्ड (लम्बक १ से ५)

कथासरित्सागर : प्रथम खण्ड (लम्बक १ से ५)

by महाकवि सोमदेव भट्ट

Source: कथासरित्सागर : प्रथम खण्ड (लम्बक १ से ५) · बिहार राष्ट्रभाषा परिषद्, पटना · 1960 (origin)

DevanagariHindipublished876 pages

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पष्ठ लम्बक ११० मन्त्रिसेना व प्रतीहार से घिर गुप्तचर और अपना मन्त्रणागृह बनाकर मन्त्रणा करने लगा और शकुन्त कन्याहरण आदि आख्यान से उसका समाधान-सत्कार किया ॥ ६६ ॥ और मन्त्री यौगन्धरायण को समझाकर कहा—'पृथ्वी में अपनी सुन्दरता से जिन अत्यन्त प्रसिद्ध कन्याओं का कवियों द्वारा गायन किया गया है। मेरा स्मरण करने के लिए उनमें से तुम (एक) उत्तम कन्या खोजकर (मुझे) लाओ जिससे मैं उसका परिणय करूँ ।' ॥ ६७ ॥ ॥ ६७ ॥ इति यौगन्धरायण का राजनैतिक षड्यन्त्र राजा से इस प्रकार कहा गया यौगन्धरायण राजा के भावी कल्याण की चिन्ता करता हुआ अपने घर के लिए प्रस्थान लगा—॥ ६८ ॥ सिंहवर्मन् की पुत्री पद्मावती का समाचार पाकर वह (मन्त्री यौगन्धरायण) विचारने लगा—'इस समय इस विषय में केवल यह (पद्मावती) ही विचारणीय है। उन दोनों की अत्यन्त मैत्री है॥ ६९ ॥' ...