कथासरित्सागर : द्वितीय खण्ड (लम्बक ६ से १८)
by महाकवि सोमदेव भट्ट
Source: कथासरित्सागर : द्वितीय खण्ड (लम्बक ६ से १८) · बिहार राष्ट्रभाषा परिषद्, पटना · 1961 (origin)
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Read in contextतृतीय तरंग ७४१-७६५ नरवाहनदत्त की कथा (क्रमागत) ७४१ शक्तिप्रभा का कौशाम्बी में आगमन ७४१ दो विद्याधरियों की कथा ७४३ शुक की आत्मकथा ७४५ सोमप्रभ मकरन्दिका और मनोरथप्रभा की कथा ७४९ मनोरथ- प्रभा की कथा ७५३। चतुर्थ तरंग ७६५-८ ३ राजा फुलबर के सेवक की कथा ७६५ संजीवक बैल और पिङ्गलक सिंह की कथा ७६७ कील उखाड़नेवाले बन्दर की कथा ७६९ दमनक और करकट का संवाद ७७१ नगाड़ा और सियार की कथा ७७३ बगुला और केकड़े की कथा ७७७ सिंह और शश की कथा ७७९ मन्दविसर्पिणी जूँ और खटमल की कथा ७८३ मदोत्कट सिंह की कथा ७८७ टिट्टिभ दम्पती की कथा ७८९ कछुए और हंस की कथा ७८९ तीन यक्षों की कथा ७९१ टिट्टिभ-दम्पती की कथा (क्रमागत) ७९३ शुभीमुख पक्षी और बन्दर की कथा ७९५ धर्मबुद्धि और दुष्टबुद्धि वैश्यों की कथा ७९७ सांप और बगुले की कथा ७९९ लोहे का तराजू और वैश्यपुत्र की कथा ८ १। पंचम तरंग ८ १-८४९ अगुरु जलानेवाले की कथा ८ ३ तिल धोनेवाले मूर्ख कृषक की कथा ८ ३ पानी में आग फेंकनेवाले की कथा ८ ५ नासिकारोपण की कथा ८ ५ मूर्ख गड़ेरिये की कथा ८ ५ अलंकारस्तम्भक की कथा ८ ७ मूर्ख रूईवाले की कथा ८ ७ खजूर काटनेवाले की कथा ८ ७ मूर्ख मन्त्री की कथा ८ ९ नमक खानेवाले की कथा ८ ९ गाय दुहुनेवाले की कथा ८ ९ मूर्खभंजे की कथा ८११ कौवा रुझा मूषक और चूहे की कथा ८१३ हिरण्यक चूहा और संन्यासी की कथा ८१७ ईर्ष्यालु पुरुष और उसकी दुष्टा स्त्री की कथा ८२३ नाग और वरुक की कथा ८२७ केशमूर्ख की कथा ८२९ तैलमूर्ख की कथा ८३१ अस्थिमूर्ख की कथा ८३१ मूर्ख चाण्डाल- कन्या की कथा ८३१ दृष्ट राजा की कथा ८३३ दो मित्रों की कथा ८३५ असमवेत मूर्ख की कथा ८३७ पुत्रघाती मूर्ख की कथा ८३७ भ्रातृमूर्ख की कथा ८३७ ब्रह्मचारी पुत्र की कथा ८३९ मूर्ख ज्योतिषी की कथा ८३९ कोदी मूर्ख की कथा ८३९ एक मूर्ख राजा की कथा ८४१ कफने के लिए दस पैसे खर्च करनेवाले मूर्ख कंजूस की कथा ८४१ समुद्र की लहरों पर निशान लगानेवाले की कथा ८४३ मांस के बदले में मांस देनेवाले राजा की