कथासरित्सागर : द्वितीय खण्ड (लम्बक ६ से १८)
by महाकवि सोमदेव भट्ट
Source: कथासरित्सागर : द्वितीय खण्ड (लम्बक ६ से १८) · बिहार राष्ट्रभाषा परिषद्, पटना · 1961 (origin)
Page 8 of 1079
Read in context– ९ – कथा ८४३ एक को मारकर दूसरा पुत्र चाहनेवाली स्त्री की कथा ८४४ एक मूर्ख सेवक की कथा ८४५ दो बन्धुओं की कथा ८४५ एक मूर्ख योद्धा की कथा ८४९ 'कुछ न' मांगनेवाले मूर्ख की कथा ८४९। षष्ठ तरंग ८४९–८८३ नरवाहनदत्त की कथा (क्रमागत) ८४९ कौआ और उल्लमा की कथा ८५१ चतुरन्त नाम के हाथी और खरगोशों की कथा ८५३ दाक्ष और कपिंजल की कथा ८५७ ब्राह्मण और धूर्त्तो की कथा ८५९ कौए और उल्लूओं की कथा का शेषांश ८५९ वृद्ध बनिया और चोर की कथा ८६१ ब्राह्मण चोर और राक्षस की कथा ८६३ रथकार और उसकी पत्नी की कथा ८६५ मेढकों के वाहन सर्प की कथा ८७१ सुवर्णमृग की कथा ८७७; मूर्ख सेवकों की कथा ८७७ अनूपमृग की कथा एक मूर्ख नौकर की कथा महिषीमृग की कथा। सप्तम तरंग ८८३-९११ यशोधर और लक्ष्मीधर की कथा ८८५ मगर और बानर की कथा ८९७ कान और हृदय से हीन गधे की कथा ९ १ धनी और गवैये की कथा ५ मूर्ख शिष्यों की कथा ९ ७ चावल छाननेवाले मूर्ख की कथा ९ ९ गधे का दूध दुहने की कथा ९ ९। अष्टम तरंग ९११-९३५ गोमुख द्वारा नरवाहनदत्त से कही गई नई-नई कथाएँ ९११ ब्राह्मण और नेवले की कथा ९११ मूर्ख रोगी और वैद्य की कथा ९१३ मूर्ख पुरुष और तपस्वियों की कथा ९१५ घट और कर्पर नाम के चोरों की कथा ९१७। नवम तरंग ९३५–९६९ गोमुख द्वारा नरवाहनदत्त को सुनाई गई विविध कथाएँ ९३५ बोधिसत्त्व के अंश से उत्पन्न बनिय की कथा ३५ सिंह की आत्मकथा ९४१ स्वर्णचूड़ पक्षी की आत्मकथा ९४३ सर्प की आत्मकथा ९४५ दुष्टा स्त्री की आत्मकथा ९४७ कृपण रंक की कथा ५३ मार्जार मूर्ख की कथा ९५५ हिरण्याक्ष की कथा ९६३। दशम तरंग ९६९–९९५ (नरवाहनदत्त की कथा (क्रमागत्) ६९।) वेला नामक एकादश लम्बक ९९७-१ १३ प्रथम तरंग मंगलाचरण ९९७ नरवाहनदत्त की कथा (क्रमागत) ७ ईश्वरदेव और पोतज की कथा १०१ व्यापारी और वेला की कथा १०१।