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कौटिलीय अर्थशास्त्रम् (सटीक - डॉ. वाचस्पति गैरोला)

कौटिलीय अर्थशास्त्रम् (सटीक - डॉ. वाचस्पति गैरोला)

Kautiliya Arthashastra with Hindi Commentary by Gairola

by आचार्य कौटिल्य (चाणक्य) / डॉ. वाचस्पति गैरोला

DevanagariSanskritpublished918 pages

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८४ कौटिल्य का अर्थशास्त्र [ दूसरा अधिकरण

(१) कलिङ्गाङ्गगजाः श्रेष्ठाः प्राच्याश्चेति करूशजाः ।
दाशार्णाश्चापरान्ताश्च द्विपानां मध्यमा मताः ॥
(२) सौराष्ट्रकाः पाञ्चनदाः तेषां प्रत्यवरा स्मृताः ।
सर्वेषां कर्मणा वीर्यं जवस्तेजश्च वर्धते ॥

इत्यध्यक्षप्रचारे द्वितीयेऽधिकरणे भूमिच्छिद्रविधानं द्वितीयोऽध्यायः;
आदितो द्वाविंशः ॥

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( १ ) कलिंग, अंग और पूर्वीय करूश देश के हाथी सर्वोत्तम गिने जाते हैं । दशार्ण तथा पश्चिम देश के हाथी मध्यम माने जाते हैं ।

( २ ) गुजरात और पंजाब के हाथी अधम कहे जाते हैं । इस पर भी, प्रत्येक हाथी के बल, विक्रम, वेग और तेज का संवर्धन आदि उसको दी जाने वाली समुचित शिक्षा पर निर्भर है ।

अध्यक्षप्रचार नामक द्वितीय अधिकरण में दूसरा अध्याय समाप्त ।

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