BharatKosha
कौटिलीय अर्थशास्त्रम् (सटीक - डॉ. वाचस्पति गैरोला)

कौटिलीय अर्थशास्त्रम् (सटीक - डॉ. वाचस्पति गैरोला)

Kautiliya Arthashastra with Hindi Commentary by Gairola

by आचार्य कौटिल्य (चाणक्य) / डॉ. वाचस्पति गैरोला

DevanagariSanskritpublished918 pages

Page 404 of 918

Read in context
Page 404

प्रकरण ७१ | विक्रीतक्रीतानुशयः अध्याय १५


(१) विक्रीय पण्यमप्रयच्छतो द्वादशपणो दण्डः, अन्यत्र दोषोपनिपाताविषह्येभ्यः। (२) पण्यदोषो दोषः। राजचोराग्न्युदकबाध उपनिपातः। बहुगुणहीनमार्तकृतं वाऽविषह्यम्। (३) वैदेहकानामेकरात्रमनुशयः। कर्षकाणां त्रिरात्रम्। गोरक्षकाणां पञ्चरात्रम्। व्यामिश्राणामुत्तमानां च वर्णानां वृत्तिविक्रये सप्तरात्रम्। (४) आतिपातिकानां पण्यानामन्यत्राविक्रेयमित्यविरोधेनानुशयो देयः। तस्यातिक्रमे चतुर्विंशतिपणो दण्डः, पण्यदशभागो वा। (५) क्रीत्वा पण्यमप्रतिगृह्णतो द्वादशपणो दण्डः, अन्यत्र दोषोपनिपाताविषह्येभ्यः। समानश्चानुशयो विक्रेतुरनुशयेन।


क्रय विक्रय का बयाना

( १ ) सौदा बेचने के बाद जो सौदागर देने से मुकर जाय उस पर बारह पण दण्ड किया जाय; सौदागर यदि किसी दोष, उपनिपात अथवा अविषह्य के कारण बेची हुई वस्तु को नहीं देता तो वह निर्दोष है।

( २ ) बेची हुई वस्तु में किसी प्रकार की खराबी आ जाना दोष कहलाता है। बेची हुई वस्तु में राजा, चोर, अग्नि तथा जल आदि के द्वारा हुई बाधा उपनिपात है। बेची हुई वस्तु का अत्यधिक गुणहीन या दुःखदाई होना अविषह्य कहलाता है।

( ३ ) क्रय-विक्रय करने वाले व्यापारियों द्वारा खरीदे गये माल का बयाना एक दिन तक लौटाया जा सकता है। इसी प्रकार किसानों का विक्रय तीन दिन तक; ग्वालों का विक्रय पाँच दिन तक और सङ्कर जाति तथा उत्तम वर्णों के जीवन-निर्वाह के आधारभूत भूमि आदि का विक्रय सात दिन तक वापिस किया जा सकता है।

( ४ ) अल्पायु ( आतिपातिक ) वस्तुओं का बयाना ( अनुशय ) इस शर्त पर दिया जाय कि वह उसको किसी दूसरे के हाथ न बेचेगा। इस नियम का उल्लङ्घन करने वाले को चौबीस पण या बिकी हुई वस्तु का दसवाँ हिस्सा दण्ड किया जाय।

( ५ ) किसी वस्तु को खरीद कर उसको लेने से यदि खरीददार मुकर जाय तो