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कौटिलीय अर्थशास्त्रम् (सटीक - डॉ. वाचस्पति गैरोला)

कौटिलीय अर्थशास्त्रम् (सटीक - डॉ. वाचस्पति गैरोला)

Kautiliya Arthashastra with Hindi Commentary by Gairola

by आचार्य कौटिल्य (चाणक्य) / डॉ. वाचस्पति गैरोला

DevanagariSanskritpublished918 pages

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३३२ कौटिल्य का अर्थशास्त्र [ तीसरा अधिकरण

(१) कुष्ठोन्मादयोश्चिकित्सकाः। संनिकृष्टाः पुमांसश्च प्रमाणम्। क्लीबभावे स्त्रियः मूत्रफेनः अप्सु विष्ठानिमज्जनं च। (२) प्रकृत्युपवादे ब्राह्मणक्षत्रियवैश्यशूद्रान्तावसायिनामपरेण पूर्वस्य त्रिपणोत्तरा दण्डाः। पूर्वेणापरस्य द्विपणाधराः। कुब्राह्मणादिभिश्च कुत्सायाम्। (३) तेन श्रुतोपवादो वाग्जीवनानां, कारुकुशीलवानां वृत्त्युपवादः, प्राग्घूणकगान्धारादीनां च जनपदोपवादा व्याख्याताः। (४) यः परम् ‘एवं त्वां करिष्यामि’ इति करणेनाभिभत्सर्येदकरणे, यस्तस्य करणे दण्डस्ततोऽर्धदण्डं दद्यात्। (५) अशक्तः कोपं मदं मोहं वाऽपदिशेत् द्वादशपणं दद्यात्। (६) जातवैराशयः शक्तश्चापकर्तुं यावज्जीविकावस्थं दद्यात्।


(१) किसी को कोढ़ी पागल सिद्ध करने के लिए उनके चिकित्सक या साथ रहने वाले ही प्रमाण माने जाँय। पेशाब में झाग न उठना और पानी में विष्ठा का डूब जाना नपुंसक स्त्री का प्रमाण समझना चाहिए।

(२) प्रकृति : ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य, शूद्र और अन्त्यज जातियों (प्रकृतियों) में यदि पूर्व-पूर्व वे एक दूसरे की निन्दा करें तो अन्त्यज को तीन पण, छह पण, नौ पण और बारह पण दंड दिया जाय। इसी प्रकार ब्राह्मण निन्दा करे तो दो पण, चार पण, छह पण और आठ पण उसको दंड दिया जाय। इसी प्रकार कुब्राह्मण, महाब्राह्मण आदि निन्दित वाक्य कहने वाले को भी यही दंड दिया जाय।

(३) श्रुति : पढ़ाई, विद्वत्ता, योग्यता आदि विषयों को लेकर वाग्जीवी, व्यक्ति यदि एक दूसरे की निन्दा करें तो उन्हें भी यही दंड दिया जाय।

वृत्ति : शिल्पी, कुशीलव (नट, नर्तक, गायक) आदि यदि एक दूसरे की आजीविका की निन्दा करें तो उन्हें भी यही दंड दिया जाय।

देश : भिन्न-भिन्न देशों के रहने वाले यदि एक दूसरे के देश की निन्दा करें तो उन्हें भी उक्त दंड दिया जाय।

(४) यदि कोई व्यक्ति किसी दूसरे व्यक्ति को यह कहकर कि 'मैं तुम्हें पीटूंगा या तुम्हारे साथ ऐसा कार्य करूँगा' धमकाये, पर मारे-पीटे नहीं तो उसे पूर्वोक्त दंड से आधा दंड दिया जाय; किन्तु जो धमकाने के साथ-साथ मारे-पीटे भी उसको आगे 'दंडपारुष्य' प्रकरण में निर्दिष्ट नियमों के अनुसार दंड दिया जाय।

(५) यदि कोई निर्बल व्यक्ति, किसी को डराये-धमकाये, क्रोध, उन्माद या पागलपन प्रकट करे तो उसपर बाहर पण दंड किया जाय।

(६) यदि यह बात साबित हो जाय कि किसी ने शत्रुतावश किसी दूसरे