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कौटिलीय अर्थशास्त्रम् (सटीक - डॉ. वाचस्पति गैरोला)

कौटिलीय अर्थशास्त्रम् (सटीक - डॉ. वाचस्पति गैरोला)

Kautiliya Arthashastra with Hindi Commentary by Gairola

by आचार्य कौटिल्य (चाणक्य) / डॉ. वाचस्पति गैरोला

DevanagariSanskritpublished918 pages

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प्र० ९० : अ० २ ] कोष का अधिकाधिक संग्रह ४१७

सन्दोहेन प्रभूतं हिरण्यसुवर्णमृणं गृह्णीयात् । प्रतिभाण्डमूल्यं च । तदुभयं रात्रौ मोषयेत् । (१) साध्वीव्यञ्जनाभिः स्त्रीभिर्दूष्यानुन्मादयित्वा तासामेव वेश्म-स्वभिगृह्य सर्वस्वान्याहरेयुः । (२) दूष्यकुल्यानां वा विवादे प्रत्युत्पन्ने रसदाः प्रणिहिता रसं दद्युः । तेन दोषणेतरे पर्यादातव्याः । (३) दूष्यमभित्यक्तो वा श्रद्धेयापदेशं पण्यं हिरण्यनिक्षेपमृणप्रयोगं दायं वा याचेत । दासशब्देन वा दूष्यमालम्बेत । भार्यामस्य स्नुषां दुहितरं वा दासीशब्देन वा भार्याशब्देन । तं दूष्यगृहप्रतिद्वारि रात्रावुपशयानमन्यत्र वा वसन्तं तीक्ष्णो हत्वा ब्रूयात्—'हतोऽयमित्थं कामुक' इति । तेन दोषेणेतरे पर्यादातव्याः । (४) सिद्धव्यञ्जनो वा दूष्यं जम्भकविद्याभिः प्रलोभयित्वा ब्रूयात्—'अक्षयं हिरण्यं राजद्वारिकं स्त्रीहृदयमरिव्याधिकरमायुष्यं पुत्रीयं वा कर्म


पड़ोस के लोगों से माँगकर या भाड़े पर सोने-चाँदी आदि के बर्तन ले आवें या अपना माल रखकर उसके बदले में अनेक व्यक्तियों की उपस्थिति में किसी से रुपया या सोना ऋण ले आवें, और दूसरे दिन जिनसे अपनी वस्तुएँ बेचनी है उनसे प्रतिवस्तु का दाम ले आवें । इन दोनों प्रकार के लाये हुए मालों की वह रात्रि में चोरी करवा दे; इस प्रकार राजकोष को भरने का यत्न करे ।

( १ ) कुलीन वेष में रहने वाली गुप्तचर स्त्रियों के द्वारा दूष्य पुरुषों को उत्साही बनाकर उन स्त्रियों के घरों में ही उनको गिरफ्तार किया जाय और तब उनका सर्वस्व छीन लिया जाय ।

( २ ) दूष्य पुरुषों के आपसी झगड़े के समय गुप्तचरों को चाहिए कि उनके पास रहते हुए किसी एक को वे विष देकर मार दें । दूसरे दूष्य का धन अपराध में अपहरण किया जाय ।

( ३ ) कोई पदच्युत या जातिच्युत व्यक्ति माल, सोने का अमानत, ऋण अथवा दायभाग आदि को दूष्य से इस प्रकार माँगे जिससे कि लोगों को विश्वास हो जाय कि इनका आपस में घनिष्ठ संबन्ध है । अथवा वह दूष्य को दास कह कर तथा उसकी स्त्री, पुत्री आदि को दासी या पत्नी आदि कह कर गाली दे । उस रात वह उसके ही द्वार पर या अन्यत्र कहीं सो जाय; फिर तीक्ष्ण पुरुष जाकर उसको मार दें और यह अफवाह फैला दें कि 'यह कामी पुरुष दूष्य के साथ इस प्रकार झगड़ा करते हुए मारा गया ।' इसी अपराध में राजा, दूष्य का सर्वस्व हर ले ।

( ४ ) अथवा सिद्ध के वेष में गुप्तचर दूष्य को ऐसा कह कर प्रलोभन दे कि

२७ कौ०