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कौटिलीय अर्थशास्त्रम् (सटीक - डॉ. वाचस्पति गैरोला)

कौटिलीय अर्थशास्त्रम् (सटीक - डॉ. वाचस्पति गैरोला)

Kautiliya Arthashastra with Hindi Commentary by Gairola

by आचार्य कौटिल्य (चाणक्य) / डॉ. वाचस्पति गैरोला

DevanagariSanskritpublished918 pages

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४१८ कौटिल्य का अर्थशास्त्र [ पाँचवाँ अधिकरण

जानामि' इति । प्रतिपन्नं चैत्यस्थाने रात्रौ प्रभूतसुरामांसगन्धमुपहारं कारयेत् । एकरूपं चात्र हिरण्यं पूर्वनिखातम् । प्रेताङ्गं प्रेतशिशुर्वा यत्र निहितः स्यात् । ततो हिरण्यस्य दर्शयेदत्यल्पमिति च ब्रूयात्—'प्रभूतहिरण्यहेतोः पुनरुपहारः कर्तव्यः' इति । स्वयमेवैतेन हिरण्येन श्वोभूते प्रभूतमौपहारिकं क्रीणीहि' इति । तेन हिरण्येनौपहारिकक्रये गृह्येत् । (१) मातृव्यञ्जनया वा 'पुत्रो मे त्वया हतः' इत्यवरूपितः स्यात् । संसिद्धमेवास्य रात्रियागे वनयागे वनक्रीडायां वा प्रवृत्तायां तीक्ष्णा विशस्याभित्यक्तमतिनयेयुः । (२) दूष्यस्य वा भृतकव्यञ्जनो वेतनहिरण्ये कूटरूपं प्रक्षिप्य प्ररूपयेत् । (३) कर्मकारव्यञ्जनो वा गृहे कर्म कुर्वाणः स्तेनकूटरूपकारकोपकरणमपनिदध्यात् । चिकित्सकव्यञ्जनो वा गरमगरापदेशेन ।


'मैं अपार हिरण्य के खजाने को देखना, राजा को वश में करना, स्त्री को वश में करना, दुश्मन को बीमार करना, आयु को बढ़ाना और सन्तान को पैदा करना आदि चमत्कार जानता हूँ।' जब दूष्य राजी हो जाय तो रात में किसी देवस्थान के पास ले जाकर गुप्तचर उसको खूब मदिरा, मांस, गन्ध आदि देवता को चढ़ाने के लिए कहे; तदनन्तर जहाँ मुर्दे का कोई अङ्ग या मरा हुआ बच्चा गड़ा हो वहाँ से, पहिले गाड़ा हुआ, पुराना सिक्का निकाल कर उससे कहे कि 'यह बहुत कम है, क्योंकि तुमने कम भेंट चढ़ाई थी । यदि तुम अधिक भेंट चढ़ाना चाहते हो तो यह सोना लो और कल अधिक सामग्री लाकर देवता को अधिक से अधिक भेंट चढ़ाना । जब दूसरे दिन दूष्य उस सुवर्ण का सामान खरीदने लगे तभी उसको गिरफ्तार करके उसका सर्वस्व अपहरण किया जाय ।

( १ ) अथवा माता-पिता के भेष में कोई गुप्तचर स्त्री दूष्य पर यह दोषारोपण करे कि 'तूने मेरा लड़का मारा है' । जब दूष्य पुरुष रात्रिहवन, वनयज्ञ और वनक्रीड़ा को प्रस्थान करे तो तीक्ष्ण लोग किसी नियुक्त किए पुरुष को मारकर दूष्य के रात्रि-हवन आदि के पास उसको गाड़ दें; और इसी अपराध में दूष्य को गिरफ्तार कर उसका सर्वस्व अपहरण किया जाय ।

( २ ) अथवा दूष्य के पास नौकर के रूप में रहने वाला कोई खुफिया वेतन में जाली सिक्का मिलाकर उसकी सूचना राजा को कर दे ।

( ३ ) अथवा चारक के वेष में दूष्य के घर कार्य करता हुआ कोई खुफिया छिपे तौर पर जाली सिक्का बनाने के सब साधन वहाँ रख दे । अथवा कोई खुफिया वैद्य दूष्य को औषधि की जगह विष दे दे ।

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