खण्डनखण्डखाद्यम् (महाकवि श्रीहर्ष - अद्वैत न्याय-खण्डन एवं तत्त्व-निर्णय सटीक)
Khandanakhandakhadya of Mahakavi Sriharsha with Commentary
by महाकवि श्रीहर्ष
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Read in contextविषयानुक्रमणिका १. मङ्गलाचरण ... ... १ २. प्रयोजन-कथन ... ... २ प्रथम परिच्छेद ३. प्रमाणादि-स्वीकार का कथाङ्गत्त्व-खण्डन ... ... ,, ४. शून्यवाद-विचार ... ... १४ ५. स्वप्रकाश-विज्ञानवाद-विचार ... ... २८ ६. शून्यवाद और स्वप्रकाश-विज्ञानवाद का भेद ... ... ४२ ७. अद्वैत में प्रमाण-विचार ... ... ४७ ८. भेद-खण्डन ... ... ६५ ६. (खण्डन के) प्रयोजन का प्रतिपादन ... ... ८२ १०. (लक्षण-) सामान्य के खण्डन की युक्तियाँ ... .... ८६ ११. प्रमालक्षण-खण्डन में तत्त्वपदार्थ का खण्डन ... ... ८७ १२. ,, अनुभूतित्व-जाति का खण्डन ... ... ६१ १३. ,, स्मृतिभिन्नत्व का खण्डन ... ... ११७ १४. भेद-संसर्गाभाव के भेद का खण्डन ... ... १२५ १५. स्मृति-लक्षण का खण्डन ... ... १४१ १६ अनुभवत्व-विशेष का खण्डन ... ... १४४ १७. तत्त्वानुभवत्व-का खण्डन ... ... ,, १८. याथार्थ्य का खण्डन ... ... १४८ १६. सम्यक्त्व का खण्डन ... ... १५४ २०. अव्यभिचारित्व का खण्डन ... ... १६० २१ अविसंवादित्व का खण्डन ... ... १६१ २२. अबाधितत्वादि का खण्डन ... ... १६६ २३. प्रमालक्षण का सामान्य-खण्डन ... ... १६७ २३. प्रमाण के सामान्य-लक्षण का खण्डन ... ... १६६ २४. (प्रमाण-लक्षण के खण्डन में) प्रथम करणत्व-लक्षण का खण्डन ... ... ,, २५. ,, द्वितीय करणत्व-लक्षण का खण्डन ... ... १७३ २६. ,, व्यापार-लक्षण का खण्डन ... ... १८३ २७.,, तृतीय करणत्व-लक्षण का खण्डन ... ... १८१ २८. ,, चतुर्थ चरमव्यापारवत्त्व-लक्षण का खण्डन ... ... १६३ २६. प्रथम प्रत्यक्ष-लक्षण (इन्द्रियार्थसन्निकर्षोत्पन्नं ज्ञानम्) का खण्डन ... ... १६८