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लीलावती (भास्कराचार्य द्वितीय - प्राचीन भारतीय गणित सटीक)

लीलावती (भास्कराचार्य द्वितीय - प्राचीन भारतीय गणित सटीक)

Lilavati of Bhaskaracharya with Hindi Commentary

by भास्कराचार्य द्वितीय (११५० ई.) / पं. रामस्वरूप शर्मा

DevanagariSanskritpublished268 pages

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श्रेढीव्यवहारः । ( ११३ ) अर्थः-जिसने याचकको पहले दिन दो वराटक देकर प्रतिदिन दूना २ देनेका इकरार किया, वह एक महीनेमें कितने निष्क देगा ? सो कहो ॥ १ ॥ न्यासः-आ० २ चये गुणः २ । गच्छः ३० । लब्धा वराटकाः २१४७४८३६४६ निष्कवरा- टकाभिर्भक्ता जाता निष्काः १०४८५७ द्रम्माः ९ पणाः ९ काकिण्यौ २ वराटकाः ६ फैलाव-इसका उदाहरणमें आदिधन दो २ है; चय द्विगुण है, गच्छ एक मास अर्थात् ३० तीस दिन हैं यहाँ सर्वधन जानना है इसालय कही हुई रीतिके अनु- सार यहां गच्छ तीस सम है तो इसका आधा १५ करके वर्ग स्थापन किया फिर पन्द्रह शेष विषम हैं इस कारण इसमें एक घटाया तब १४ रहे और गुणस्थान किया फिर १४ सम है. इस कारण आधा किया ७ और वर्ग स्थापन किया फिर शेष ७ वर्ग-वर्ग १०७३७४१८२४ विषम है इसकारण एक घटाया, तब गुण-२ गुण .... .... ३२७६८ ६ छ रहे और स्थापन किया, फिर ६ वर्ग-वर्ग .... .... १६३८४ सम हैं इस कारण आधा किया ३ और गुण-२ गुण .... .... १२८ वर्ग स्थापन किया, फिर शेष ३ विषम वर्ग-वर्ग .... .... .... ६४ है. इस कारण एक घटाया तब २ रहा गुण-२ गुण ... .... .... ८ और वर्ग स्थापन किया,फिर २ सम हैं; वर्ग-वर्ग .... .... .... ४ इस कारण आधा १ किया और वर्ग- गुण-२ गुण .... .... .... २ स्थापन किया फिर १ विषम है इस कारण एक घटाया और गुण स्थापन किया इस प्रकार किया करनेसे अब शून्य रह गया अब उलटी तरफ अर्थात् पिछली (नीचेकी) तरफ गुण है इस कारण गुण दो २ दो २ (दुगना देना स्वीकार कियाहै, इसकारण गुण दो २ है) को गुणके सामने लिखा. फिर गुणके ऊपर वर्ग है, इसकारण उन दोका वर्ग करके ४ वर्गके सामने लिखा. फिर वर्गके ऊपर गुण है; इस कारण इन चारको दो२से गुणा करके ८ गुणके सामने लिखा. फिर गुणके ऊपर वर्ग है; इस कारण ८ का वर्ग करके ६४ वर्गके सामने लिखा. फिर वर्गके ऊपर गुण है; इस कारण ६४ को २ से गुणके लिखा इस प्रकार ऊपर तक किया तब १०७३७४१८२४ हुए, इसमें एक घटाया तब बचे १०७३७४१८२३ इस अङ्कमें एक १ करके हीन जो गुण १ है उसका भाग ६

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