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माधव निदान (मधुकोश व्याख्या व हिन्दी अनुवाद सहित)

माधव निदान (मधुकोश व्याख्या व हिन्दी अनुवाद सहित)

Madhava Nidana with Madhukosha & Hindi Translation

by माधवकर

Source: खेमराज श्रीकृष्णदास · खेमराज श्रीकृष्णदास (origin)

DevanagariSanskritpublished404 pages

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( १२६ ) माधवनिदान । पानविभ्रमके उपद्रव कहते हैं— हिक्काज्वरौ वमथुवेपथुपार्श्वशूलाः कासभ्रमावपि च पानहतं त्यजेत्तम् ॥ २२ ॥ हिचकी, ज्वर, वमन, कंप, पसवाडोंमें पीडा होय, खांसी, भ्रम ये उपद्रव जिसको होयँ उसको वैद्य त्याग दे, परन्तु जैजट आचार्य कहते हैं कि, असाध्य लक्षणसे पृथक् पाठ होनेसे और यह लक्षण होनेसे रोगी कृच्छ्रसाध्य जानना असाध्य न जानना ॥ इति श्रीपण्डितदत्तराममाथुरनिर्मितमाधवार्थबोधिनीमाथुरी- भाषाटीकायां मदात्ययरोगनिदानं समाप्तम् ॥ अथ दाहनिदानम् । दाहरोग सात प्रकारका है—तिसमें प्रथम मद्यजन्य दाहके लक्षण कहते हैं— त्वचं प्राप्तः स पानोष्मा पित्तरक्ताभिमूर्च्छितः । दाहं प्रकुरुते घोरं पित्तवत्तत्र भेषजम् ॥ १ ॥ मद्यपान करनेसे कुपित भया जो पित्त उस पित्तकी उष्णता पित्तरक्तको बढ़ाय भयंकर दाहरोग उत्पन्न करे इसमें पित्तके समान औषध करे ॥ रक्तज और पित्तज दाहके लक्षण । कृत्स्नदेहानुगं रक्तमुद्रिक्तं दहति ध्रुवम् । समुष्यते तृष्यते च ताम्राभस्ताम्रलोचनः ॥ २ ॥ लोहगन्धाङ्गवदनो वह्निनेवाव- कीर्यते । पित्तज्वरसमः पित्तात्स चाप्यस्य विधिः स्मृतः ॥ ३ ॥ सर्व देहका रुधिर कुपित होकर अत्यन्त दाह करे और वह रोगी अग्निके समीप रहनेसे जैसा तपे है ऐसा तपे, प्यासयुक्त, ताम्रके रंगसदृश देहका रंग होय और नेत्र भी लाल होयँ, तथा मुखसे और देहसे तप्त लोहेपर जल डालनेकीसी गन्ध आवे और अंगोंमें मानों किसीने अग्नि लगाय दीनी ऐसी वेदना होय, पित्तसे जो दाह होय उसमें पित्तज्वरकेसे लक्षण होते हैं उसपर पित्तज्वरकी चिकित्सा करनी चाहिये । पित्तज्वरमें और पित्तके दाहमें इतना अन्तर है कि, पित्तज्वरमें अरति आमा शयका दुष्ट होना होता है और पित्तके दाहमें नहीं होता और सब लक्षण होते हैं ॥ प्यास रोकनेके लक्षण । तृष्णानिरोधादब्धातौ क्षीणे तेजः समुद्धतम् । CC-0. JK Sanskrit Academy, Jammmu. Digitized by S3 Foundation USA