भारतकोश
माधव निदान (मधुकोश व्याख्या व हिन्दी अनुवाद सहित)

माधव निदान (मधुकोश व्याख्या व हिन्दी अनुवाद सहित)

Madhava Nidana with Madhukosha & Hindi Translation

माधवकर द्वारा

स्रोत: खेमराज श्रीकृष्णदास · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished404 पृष्ठ

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भाषाटीकासमेत । ( १२६ ) कफका कोप ( यह नासास्रावादिक जानना ), देहका जड होना, मुखमें मिठास, मलमूत्रका अवरोध, तन्द्रा । अरुचि, प्यास, मस्तकमें पीडा और सन्धियोंमें कुठारीसे तोडने सरीखी पीडा होय ये परमदके लक्षण जानने ॥ पानाजीर्णके लक्षण । आध्मानमुग्रमथवोद्गिरणं विदाहः पाने त्वजीर्णमुपगच्छति लक्षणानि । पेटका अत्यन्त फूलना, वमन, डकारका आना, जलन होना ये लक्षण जब मद्याजीर्ण होय है तब होते हैं ॥ पानविभ्रमके लक्षण । हृद्गात्रतोदकफसंस्रवकण्ठधूममूर्च्छावमिज्वरशिरोरुजनप्रदेहाः॥ २० द्वेषः सुरान्नविकृतेष्वपि तेषु तेषु तं पानविभ्रममुशन्त्यखिलेनधीराः ॥ हृदय और गात्र इनमें सुई चुभानेकीसी पीडा होय, कफका स्राव होय, कण्ठसे धुवां निकलनेकीसी पीडा, मूर्च्छा, वमन, ज्वर, शिरमें पीडा, मुख कफसे लिप्तसासा होय, अनेक प्रकारकी मैरेय पैष्टिक इत्यादिक सुराविकृति और लड्डू, पेडा आदि अन्नविकृति इनमें द्वेष होय इन सर्व लक्षणसे इस रोगको ( पानविभ्रम ) ऐसे कहते हैं । सन्निपातके अन्तर्गत होनेसे ये परमदादिक तीनों चरकने नहीं कहे और पूर्वोक्त मदात्ययके लक्षणसे विलक्षण होनेसे सुश्रुतमें उक्त त्रिदोषज मदात्य- यको पृथक् कहा है ॥ पानविभ्रमके असाध्य लक्षण । हीनोत्तरोष्ठमतिशीतममन्ददाहं तैलप्रभास्यमतिपानहतं त्यजेत्तम् ॥ २१ ॥ जिह्वौष्ठदन्तमसितं त्वथवापि नीलं पीतं च यस्य नयने रुधिरप्रभे वा । ऊपरके होठसे नीचेका होठ कुछ लम्बा होय, देहके बाहर अतिशीत लगे और भीतर अत्यन्त दाह होय, तेलसे लिप्तसदृश मुख हो, जीभ होठ दांत ये काले अथवा नीले हो जायँ, नेत्र पीले, अथवा रुधिरके समान लाल होयँ ऐसे अतिपानसे अर्थात् अतिमद्य पीनेसे नष्ट मनुष्यको वैद्य त्याग दे । चरकमें ध्वंसक, विक्षेपक दो मद्यविकार और कहे हैं ॥ १ विच्छिन्नमद्यः सहसा योऽतिमद्यं निषेवते । ध्वंसो विक्षेपकश्चैव रोगस्तस्योपजाते ॥ १॥ श्लेष्माप्रसेकः कंठास्यशोषः सर्वासहिष्णुता । निद्रातन्द्रातियोगश्च ज्ञेयं ध्वंसकलक्षणम् ॥ २ ॥ हृत्कण्ठरोगसंमोहच्छर्द्दिरंगरुजाज्वरः । तृष्णाकासशिरःशूलमेतद्विक्षेपलक्षणम् ॥ ३ ॥