BharatKosha
माधव निदान (मधुकोश व्याख्या व हिन्दी अनुवाद सहित)

माधव निदान (मधुकोश व्याख्या व हिन्दी अनुवाद सहित)

Madhava Nidana with Madhukosha & Hindi Translation

by माधवकर

Source: खेमराज श्रीकृष्णदास · खेमराज श्रीकृष्णदास (origin)

DevanagariSanskritpublished404 pages

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( १७४ ) माधवनिदान । और भोजनके करनेके पिछाडी नरम हो जाय, वह गोला बादीसे प्रगट होय है उसमें रूखा कसैला कडुवा तीखा पदार्थ खानेसे सुख नहीं होय ॥ पित्तगुल्मके कारण और लक्षण । कट्वम्लतीक्ष्णोष्णविदाहिरूक्षं क्रोधातिमद्यार्कहुताशसेवा । आमाभिघातो रुधिरं च दुष्टं पैत्तस्य गुल्मस्य निमित्तमुक्तम् ॥ ९ ॥ ज्वरः पिपासा वदनाङ्गरागः शूलं महज्जीर्यति भोजने च । स्वेदो विदाहो व्रणवच्च गुल्मः स्पर्शासहः पैत्तिकगुल्मरूपम् ॥ १०॥ कटु, खट्टा, तीक्ष्ण रस, दाहकारक (वंशकरीलादिक), रूखा ऐसे भोजन कर- नेसे, क्रोधसे, अति मद्यपानसे, सूर्यकी धूपमें डोलनेसे, अग्निके समीप रहनेसे, विदग्ध अजीर्णसे, दुष्ट भया रस उससे, अभिघात कहिये लकडी आदि लगनेसे रुधिरका बिगडना ये पित्तगुल्मके कारण कहे हैं। ज्वर, प्यास, मुख और अंगोंमें लालपना, अन्न पचनेके समय अत्यन्त शूल होय, पसीना आवे, जलन होय, फोडाके समान स्पर्श सहा न जाय ये पित्तगुल्मके लक्षण हैं ॥ कफके और सन्निपातके गुल्मके कारण और लक्षण । शीतं गुरु स्निग्धमचेष्टनं च संपूर्णं प्रस्वपनं दिवा च । गुल्मस्य हेतुः कफसंभवस्य सर्वस्तु दुष्टो निचयात्मकस्य ॥ ११ ॥ स्तैमित्यशीतज्वरगात्रसादहृल्लासकासारुचिगौरवाणि । शैत्यं रुगल्पा कठिनोन्नतत्वं गुल्मस्य रूपाणि कफात्मकस्य ॥१२॥ शीतल, भारी, चिकने ऐसे पदार्थके सेवनसे, तृप्तिकी अपेक्षा अधिक भोजन करना, दिनमें सोना यह कफोत्पन्न गुल्म होनेके कारण हैं और जो वातजादि तीनों गुल्मके कारण कहे हैं वे सन्निपातगुल्मके कारण जानने । देहका गीलापना, शीतज्वर शरीरकी ग्लानि, सूखी रद् (उबकी), खांसी, भारीपना, शीतका लगना, थोडी पीडा होय गुल्म (गोला) कठिन होय और ऊंचा होय इतने ये सब कफात्मकगुल्मके लक्षण हैं ॥ द्वन्द्वजगुल्मके लक्षण । निमित्तलिङ्गान्युपलभ्य गुल्मे संसर्गजे दोषबलाबलं च । व्यामिश्रलिङ्गानपरांश्च गुल्मांस्त्रीनादिशेदौषधकल्पनार्थम् ॥ १३ ॥ द्वन्द्वज गुल्ममें कारण लक्षण और दोषोंका बलाबल जानकर चिकित्सा कर- नेके वास्ते मिश्र लक्षणसे और तीन गुल्म समझने चाहिये, अर्थात् एक दोष बल-