माधव निदान (मधुकोश व्याख्या व हिन्दी अनुवाद सहित)
Madhava Nidana with Madhukosha & Hindi Translation
by माधवकर
Source: खेमराज श्रीकृष्णदास · खेमराज श्रीकृष्णदास (origin)
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Read in contextभाषाटीकासमेत । (९) संख्यारूप सम्प्राप्तिके लक्षण । सा भिद्यते यथात्रैव वक्ष्यन्तेऽष्टौ ज्वरा इति ॥ ११ ॥ जैसे इसी ग्रन्थमें आगे आठ प्रकारका ज्वर पांच प्रकारकी खांसी अर्थात् रोगोंकी गणनाको ही संख्यारूप सम्प्राप्ति कहते हैं ॥ विकल्परूप संप्राप्तिके लक्षण । दोषाणां समवेतानां विकल्पोऽंशांशकल्पना । मिले हुए दोष कहिये वात पित्त कफ इनके अंशांशका अनुमान करना उसका विकल्परूपसम्प्राप्ति कहते हैं, जैसे-धुआँके निकलनेसे यह पर्वत अग्निवाला है ऐसेही यह रोगीके देहमें वातका अंश विशेष है, काहेसे कि, वातके अंश विशेष मिलनेसे इसी अनुमानको विकल्पसंप्राप्ति कहते हैं । उदाहरण-जैसे रूखी शीतल हलकी और फैलानेवाली इत्यादि गुणयुक्त जो पवन उसका रूक्ष आदि गुणयुक्त कसैला रस वातको सर्वांश करके बढानेवाला है, ऐसेही कटुरस सर्व भाव करके पित्तको बढा- नेवाला है अर्थात् कटु, उष्ण, तीक्ष्णत्व करके हींग पित्तको बढानेवाली है ऐसेही मधुररस, जैसे भैंसका दूध यह सर्व भावकरके कफ बढानेवाली है इत्यादि । इसमें “दोषाणां” जो बहुवचन है सो दोषोंके पृथक् पृथक् ग्रहणके वास्ते है और “सम- वेतानाम्” यह पद जो है सो द्वंदूज और सन्निपातके ग्रहणनिमित्त धरा है ॥ प्राधान्यरूपसंप्राप्तिके लक्षण । स्वातंत्र्यपारतंत्र्याभ्यां व्याधेः प्राधान्यमादिशेत् ॥ १२ ॥ व्याधेः स्वातंत्र्येण च पुनः पारतंत्र्येण प्राधान्यम् आदिशेत् अप्राधान्यं चेति शेष इत्यन्वयः ॥ व्याधिके स्वतन्त्रता और परतन्त्रता करके प्रधानता और अप्रधानता कही है जैसे स्वतन्त्र ज्वरको प्रधानता है और ज्वराधीन श्वास आदि रोगोंको अप्रधानता है अर्थात् व्याधिकी स्वतंत्रतासे प्रधानता और परतंत्रतासे अप्रधानता जाननी चाहिये ॥ बलरूपसंप्राप्तिके लक्षण । हेत्वादिकात्स्न्र्यावयवैर्बलाबलविशेषणम् । अत्रापि व्याधेरित्यनुवर्तते । हेत्वादीनां हेतुपूर्वरूपरूपाणां कात्स्न्र्येन साकल्येन अवयवैरेकदेशैर्बलाबलयोर्विशेषणं विशेषावबोधः इत्यन्वयः । हेतु आदिशब्दोंसे हेतु, पूर्वरूप और रूप इनके सर्व अवयव ( लक्षण ) मिल- नेसे व्याधिको बलवान् जानना और थोडे लक्षण मिलनेसे निर्बल जानना; जैसे रोगके प्रति जो निदान कहा है वह निदान सम्पूर्ण रोगोंको उत्पन्न करनेवाला है कि एकदेश, ऐसे ही पूर्वरूप भी समस्त अवयवों करिके व्याधिका प्रकाशित है यह एकदेशसे इत्यादि ॥ CC-0. JK Sanskrit Academy, Jammmu. Digitized by S3 Foundation USA