महाभारत (खंड १) - आदि व सभा पर्व
Mahabharata (Vol 1) - Adi and Sabha Parva
by महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास
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Read in contextकन्याओंको उत्पन्न किया। उनमेंसे एकका नाम रोहिणी था और दूसरीका गन्धर्वी। गन्धर्वी बड़ी यशस्विनी थी ।। ६६-६७ ।।
विमलामपि भद्रं ते अनलामपि भारत ।
रोहिण्यां जज्ञिरे गावो गन्धर्व्यां वाजिनः सुताः ।
सप्त पिण्डफलान् वृक्षाननलापि व्यजायत ।। ६८ ।।
भारत! तत्पश्चात् रोहिणीने विमला और अनला नामवाली दो कन्याएँ और उत्पन्न कीं। रोहिणीसे गाय-बैल और गन्धर्वीसे घोड़े ही पुत्ररूपमें उत्पन्न हुए। अनलाने सात प्रकारके वृक्षोंको* उत्पन्न किया, जिनमें पिण्डाकार फल लगते हैं ।। ६८ ।।
अनलायाः शुकी पुत्री कङ्कस्तु सुरसासुतः ।
अरुणस्य भार्या श्येनी तु वीर्यवन्तौ महाबलौ ।। ६९ ।।
सम्पातिं जनयामास वीर्यवन्तं जटायुषम् ।
सुरसाजनयन्नागान् कद्रूः पुत्रांस्तु पन्नगान् ।। ७० ।।
द्वौ पुत्रौ विनतायास्तु विख्यातौ गरुडारुणौ ।
अनलाके शुकी नामकी एक कन्या भी हुई। कंक पक्षी सुरसाका पुत्र है। अरुणकी पत्नी श्येनीने दो महाबली और पराक्रमी पुत्र उत्पन्न किये। एकका नाम था सम्पाती और दूसरेका जटायु। जटायु बड़ा शक्तिशाली था। सुरसा और कद्रूने नाग एवं पन्नग जातिके पुत्रोंको उत्पन्न किया। विनताके दो ही पुत्र विख्यात हैं, गरुड और अरुण ।। ६९-७० १/२ ।।
(सुरसाजनयत् सर्पाञ्छतमेकशिरोधरान् ।
सुरसाकन्यका जातास्तिस्रः कमललोचनाः ।।
वनस्पतीनां वृक्षाणां वीरुधां चैव मातरः ।
अनला रुहा च द्वे प्रोक्ते वीरुधां चैव ताः स्मृताः ।।
गृह्णन्ति ये विना पुष्पं फलानि तरवः पृथक् ।
अनलासुतास्ते विज्ञेयाः तानेवाहुर्वनस्पतीन् ।।
पुष्पैः फलग्रहान् वृक्षान् रुहायाः प्रसवान् विभो ।
लतागुल्मानि वल्यश्च त्वक्सारतृणजातयः ।।
वीरुधायाः प्रजास्ताः स्युरत्रवंशः समाप्यते ।)
सुरसाने एक सौ एक सिरवाले सर्पोंको जन्म दिया था। सुरसासे तीन कमलनयनी कन्याएँ उत्पन्न हुईं, जो वनस्पतियों, वृक्षों और लता-गुल्मोंकी जननी हुईं। उनके नाम इस प्रकार हैं—अनला, रुहा और वीरुधा। जो वृक्ष बिना फूलके ही फल ग्रहण करते हैं उन सबको अनलाका पुत्र जानना चाहिये; वे ही