महाभारत (खंड १) - आदि व सभा पर्व
Mahabharata (Vol 1) - Adi and Sabha Parva
by महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास
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Read in contextवनस्पति कहलाते हैं। प्रभो! जो फूलसे फल ग्रहण करते हैं उन वृक्षोंको रुहाकी संतान समझो। लता, गुल्म, वल्ली, बाँस और तिनकोंकी जितनी जातियाँ हैं उन सबकी उत्पत्ति वीरुधासे हुई है। यहाँ वंशवर्णन समाप्त होता है।
इत्येष सर्वभूतानां महतां मनुजाधिप ।
प्रभवः कीर्तितः सम्यङ्मया मतिमतां वर ।। ७१ ।।
यं श्रुत्वा पुरुषः सम्यङ्मुक्तो भवति पाप्मनः ।
सर्वज्ञतां च लभते गतिमग्रयां च विन्दति ।। ७२ ।।
बुद्धिमानोंमें श्रेष्ठ राजा जनमेजय! इस प्रकार मैंने सम्पूर्ण महाभूतोंकी उत्पत्तिका भलीभाँति वर्णन किया है। जिसे अच्छी तरह सुनकर मनुष्य सब पापोंसे पूर्णतः मुक्त हो जाता है और सर्वज्ञता तथा उत्तम गति प्राप्त कर लेता है ।। ७१-७२ ।।
इति श्रीमहाभारते आदिपर्वणि सम्भवपर्वणि षट्षष्टितमोऽध्यायः ।। ६६ ।।
इस प्रकार श्रीमहाभारत आदिपर्वके अन्तर्गत सम्भवपर्वमें अंशावतरणविषयक छाछठवाँ अध्याय पूरा हुआ ।। ६६ ।।
(दाक्षिणात्य अधिक पाठके ४ १/३ श्लोक मिलाकर कुल ७६ १/३ श्लोक हैं)
* मनुस्मृतिमें प्रजापति दक्षको ही पुत्रिका-विधिका प्रवर्तक बताकर उसका लक्षण इस प्रकार दिया है—
अपुत्रोऽनेन विधिना सुतां कुर्वीत पुत्रिकाम् । यदपत्यं भवेदस्यां तन्मम स्यात् स्वधाकरम् ।। (९।१२७)
जिसके पुत्र न हों वह निम्नांकित विधिसे अपनी कन्याको पुत्रिका बना ले—यह संकल्प कर ले कि इस कन्याके गर्भसे जो बालक उत्पन्न हो, वह मेरा श्राद्धादि कर्म करनेवाला पुत्ररूप हो।
* किसी-किसीके मतमें शाख, विशाख और नैगमेय—ये तीनों नाम कुमार कार्तिकेयके ही हैं। किन्हींके मतमें कुमार कार्तिकेयके पुत्रोंकी संज्ञा शाख, विशाख और नैगमेय है। कल्पभेदसे सभी ठीक हो सकते हैं।
* खर्जूरं तालहिन्तालौ ताली खर्जूरिका तथा । गुणका नारिकेलश्च सप्त पिण्डफला द्रुमाः ।। (खजूर, ताल, हिन्ताल, ताली, छोटे खजूर, सोपारी और नारियल—ये सात पिण्डाकार फलवाले वृक्ष हैं।)